(समाज वीकली)

तेरा साथ पाने को हम बार-बार इस धरा पे आते,
‘गर लेने पड़ते सात जन्म वो भी कम पड़ जाते ।
दनिया में हो एक तुम जिससे प्यार हुआ
चेहरा तेरा ही है
आज जिसका दीदार हुआ,
साथ न छोड़ना
कभी मुख न मोड़ना।
दिल धड़कता है
बस ! तेरे लिए
कभी तुम
मेरा दिल न तोड़ना।
क्या कहूँ ?
जनाब ! क्या बतलाऊँ ?
कुछ मालूम न पड़े
अब किधर को जाऊँ ?
जीवन की नैया अब हवाले तेरे
तुम ही कहना
तुम ही बतलाना
कुछ समझ न आए मेरे ….
मास्टर संजीव धर्माणी
9478561356