HOME पहलगाम की त्रासद घटना का चुनावी उपयोग बंद हो

पहलगाम की त्रासद घटना का चुनावी उपयोग बंद हो

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(अखिलेंद्र प्रताप सिंह, संस्थापक सदस्य, एआईपीएफ का वक्तव्य)

समाज वीकली

अखिलेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ,  यह अत्यंत खेदजनक है कि प्रधानमंत्री बिहार में मंचों से जोर-शोर से कहते हैं कि ‘‘किसी को बख्शा नहीं जाएगा”, लेकिन जब मणिपुर या कश्मीर जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों की बात आती है, तो वे वहां का दौरा तक नहीं करते। ऐसे त्रासद मुद्दों पर चुनावी राजनीति उचित नहीं है। यदि प्रधानमंत्री श्रीनगर जाकर वहाँ से बयान देते और स्थिति की समीक्षा करते, तो यह देश और दुनिया को एक मजबूत संदेश देता।

हम इस बात को भी रेखांकित करते है कि कश्मीर के स्थानीय नागरिकों ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद साहसिक और स्पष्ट संदेश दिया है, जबकि वे खुद विभाजनकारी राजनीति, अस्थिरता और तमाम कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उनका यह जज्बा सराहनीय है।

पहलगाम जैसी घटना में देश के अंदर प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता के अभाव में पाकिस्तान को ‘फाल्स फ्लैग आपरेशन’ जैसे षडयंत्र के सिद्धांत को गढ़ने, विश्व जनमत को गुमराह करने का मौका मिलता है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसी घटनाओं की सच्चाई स्पष्ट रूप से दुनिया के सामने लाए।

यह केवल एक कानून व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि नीतिगत विफलता है, जो भाजपा सरकार की जम्मू-कश्मीर को लेकर बनाई गई रणनीति के चलते सामने आई है। अब समय आ गया है कि इन नीतियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। राज्य का पुनर्गठन कर वहां की जनता को अधिकार देकर, उनका विश्वास जीतकर ही आतंकवाद का मुकाबला किया जा सकता है।

मृतकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हमारी यह मांग है कि उनके परिवारों को हर स्तर पर समुचित सहायता और मुआवजा दिया जाए। साथ ही, इस घटना को सांप्रदायिक चश्मे से देखना बंद किया जाना चाहिए – मृतक भारतीय नागरिक हैं और उनके लिए न्याय समान रूप से होना चाहिए।

एस आर दारापुरी,

राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट

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