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भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का 70वां परिनिर्वाण दिवस धूमधाम से मनाया गया

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अंबेडकर भवन के ट्रस्टी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मुख्य अतिथि का सम्मान करते हुए

भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय का पवित्र दस्तावेज- प्रो. मंजीत सिंह

जालंधर (समाज वीकली यू के): अंबेडकर भवन ट्रस्ट द्वारा बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर के 70वें परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर अंबेडकर भवन, डॉ. अंबेडकर मार्ग, जालंधर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में अन्य बौद्धिक वक्ताओं के अलावा, प्रो. (डॉ.) मंजीत सिंह, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। समारोह की शुरुआत अंबेडकर भवन के ट्रस्टी श्री हरमेश जस्सल द्वारा बुद्ध बंदना, त्रिशन और पंचशील का पाठ का उच्चारण करने के बाद हुयी। प्रो. मंजीत सिंह ने अपने भाषण में कहा कि डॉ. आंबेडकर एक साधारण परिवार और तथाकथित अछूत समाज से उठकर सामाजिक न्याय के पवित्र दस्तावेज ‘भारतीय संविधान’ के निर्माता बने, जिसके माध्यम से उन्होंने जातिवाद की जननी मनुस्मृति की विचारधारा को समाप्त कर भारत में समानता, स्वतंत्रता, सांप्रदायिक एकता और न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का सराहनीय प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के एजेंडे ने सब कुछ नष्ट कर दिया है। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में रूढ़िवादियों के बढ़ते प्रभाव, दलितों, श्रमिकों, मजदूरों और किसानों की कमजोर होती सामाजिक और आर्थिक स्थिति, किसान और छात्र आंदोलन की गौरवपूर्ण सफलता सहित वर्तमान राजनीतिक माहौल का भी उल्लेख किया।

प्रो. मंजीत सिंह ने कहा कि तथागत बुद्ध के बाद जाति प्रथा और वर्ण व्यवस्था पर सबसे निर्णायक प्रहार डॉ. आंबेडकर ने ही किया था। बाबा साहेब अंबेडकर ने तो किया था, लेकिन तथाकथित उच्च वर्ग की मानसिकता में यह भावना आज भी विद्यमान है। बाबा साहेब की 70वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के आरंभ में अंबेडकर भवन ट्रस्ट के महासचिव डॉ. जी. सी. कौल ने मुख्य वक्ता प्रो. मंजीत सिंह का डॉ. अंबेडकर जी से जुड़ी ऐतिहासिक भूमि, अंबेडकर भवन, पर पधारने पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर एक महान विचारक थे और उनके निधन के बाद अंबेडकर की विचारधारा पूरे विश्व में आलोकित हो रही है। ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सोहन लाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत में समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का वातावरण बनाया। उन्होंने कृषि के विकास, सिंचाई सुविधाओं के विकास, बाँधों के निर्माण, रिज़र्व बैंक की स्थापना और आधुनिक भारत के निर्माण के पीछे बाबासाहेब द्वारा किए गए अनेक कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने अतिथियों और श्रोताओं का भी आभार व्यक्त किया।इस मौके पर चरण दास संधू और बीबी मोहिंदो रत्तू ने भी अपने विचार रखे।

इस कार्यक्रम में सरब श्री बलदेव राज भारद्वाज, डॉ. टी. एल. सागर, प्रो. बलवीर, प्रो. अरिंदर सिंह, प्रो. अश्नी जस्सल, पूर्व राजदूत रमेश चंद्र, महेंद्र सल्हन, सुजाता सल्हन, सिद्धार्थ भारद्वाज, गुरदीप सिंह सहायक महाधिवक्ता पंजाब, तिलक राज, ज्योति प्रकाश, निर्मल बिनजी, डॉ. महेंद्र संधू, पिशोर लाल संधू, सूरज प्रकाश विरदी, राजिंदर जस्सल, एडवोकेट मोहन लाल फिलौरिया, एडवोकेट मधु रचना, रमेश चोक्कां, परमजीत महे, चमन सांपला, मलकीत सिंह, एसएस भट्टी, चिरंजी लाल कंगनीवाल, रवि एएसआई, हरि सिंह थिंद, प्रिंसिपल के.एस. फुल्ल, लेख राज जस्सल, तीरथ भारद्वाज, डॉ. गुरनाम सिंह और सुखचरण विशेष रूप से उपस्थित थे। यह जानकारी अंबेडकर भवन ट्रस्ट (रजि.) के वित्त सचिव बलदेव राज भारद्वाज द्वारा प्रेस को एक बयान जारी कर दी गयी।

बलदेव राज भारद्वाज,
वित्त सचिव,
अंबेडकर भवन ट्रस्ट (रजि.), जालंधर

कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ

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