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पूर्वोत्तर भारत को म्यांमार में स्थिर सरकार की उम्मीद

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नव ठाकुरीया   (समाज वीकली)   भारत सैन्य-शासित म्यांमार (बर्मा और ब्रह्मदेश) में चल रहे राष्ट्रीय चुनावों पर पैनी नजर रख रहा है इस उम्मीद के साथ कि लगभग 5.5 करोड़ की आबादी वाले बौद्ध बहुसंख्यक देश में एक स्थिर सरकार होगी। सैन्य-प्रेरित चुनावों की वैश्विक निंदा के बीच, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र- जो उत्तरी म्यांमार के साथ 1643 किलोमीटर की खुली सीमा साझा करता है- आशा करता है कि चुनावों के बाद  दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश  से अवैध मादक पदार्थों और हथियारों की अनियंत्रित तस्करी कम हो जाएगी। इसके अलावा, पड़ोसी म्यांमार के सैन्य और कुछ पूर्वोत्तर विद्रोहियों के बीच गुप्त संबंधों को भी सुलझाने की आवश्यकता हो सकती है, साथ ही सभी म्यांमार शरणार्थियों को यथाशीघ्र इस संकटग्रस्त देश में वापस भेजने की भी ज़रूरत है। इस बीच, म्यांमार में गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बीच 28 दिसंबर और 11 जनवरी को आम चुनाव के दो चरण संपन्न हुए, जिनमें मतदान बहुत कम रहा। कुल 202 (100 प्लस 102) संसदीय सीटें  में मतदान हुआ, हालांकि कई इलाकों में मतदान नहीं हुआ क्योंकि वे सैन्य सरकार के नियंत्रण में नहीं थे। सैन्य विरोधी जातीय संगठन, जन रक्षा बल (people’s defence forces) और अन्य सशस्त्र प्रतिरोध संगठन (जो वर्तमान में म्यांमार के एक तिहाई क्षेत्र पर शासन करते हैं) ने चुनावों का कड़ा विरोध किया। तीसरे चरण का मतदान 25 जनवरी को निर्धारित है, जिसमें केवल 63 संसदीय सीट शामिल होंगे। इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों (म्यांमार में पहली बार इस्तेमाल की जा रही) के अंतिम परिणाम इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि 1 फरवरी 2021 को म्यांमार में तख्तापलट हुआ, जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू  ची (Aung San Suu Kyi) के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिरा दिया गया। तब से नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (National League for Democracy) के सर्वोच्च नेता सू  ची (जिन्हें 27 साल की कैद की सजा सुनाई गई है), राष्ट्रपति यू विन म्यिंट (जिन्हें 12 साल की सजा मिली है) और हजारों एनएलडी नेता-कार्यकर्ता जेलों में बंद हैं। उल्लेख करने योग्य,  2015 और 2020 के राष्ट्रीय चुनावों में भारी जीत हासिल करने वाली एनएलडी की अनुपस्थिति ने इस चुनावों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है । दुनिया भर के लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने गरीबी से जूझ रहे म्यांमार की चुनावी प्रक्रिया को एक दिखावटी चुनाव करार दिया है। जनरल मिन आंग ह्लाइंग के नेतृत्व वाली सैन्य शासन द्वारा नियुक्त निर्वाचन आयोग  ने 274 (कुल सीटें 330) कस्बों में मतदान की योजना बनाई, जबकि बाकी  क्षेत्रों को अशांत और अस्थिर घोषित किया गया । दोनों दिन सुबह 6 बजे भारी सुरक्षा व्यवस्था

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