
लखनऊ: (समाज वीकली) आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट का निश्चित मत है कि समाज का वास्तविक एक्सरे करने के लिए जाति जनगणना के साथ साथ आर्थिक-सामाजिक जनगणना करना बेहद जरूरी है। क्योंकि इसके बिना विभिन्न जाति समूहों की आर्थिक संसाधनों जैसे पदों के अनुरूप सरकारी नौकरी, रोजगार, भूमि, आवास, संपदा तथा आय आदि में हिस्सेदारी की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाएगी। ज्ञातव्य है कि 2011 की जनगणना में जाति जनगणना के साथ साथ आर्थिक-सामाजिक जनगणना भी कराई गई थी, परंतु सरकार ने उसका डेटा जारी नहीं किया। अतः एआईपीएफ सरकार से मांग करता है कि आगामी जनगणना में न केवल जाति बल्कि आर्थिक जनगणना भी की जाए ताकि सभी जाति समूहों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति स्पष्ट हो सके। जिसके आधार पर सामाजिक एवं आर्थिक विषमताओं को कम करने तथा संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण हेतु नीतियाँ बनाई जा सकें।
भवदीय
एस. आर. दारापुरी,
राष्ट्रीय अध्यक्ष ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ।



