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टैगोर के राष्ट्रगान : दक्षिण एशिया के बेशकीमती रत्न

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राम पुनियानी

राम पुनियानी

  (समाज वीकली)  भाजपा की वाशिंग मशीन में धुल चुके असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अब एक आक्रामक दक्षिणपंथी हैं। वे समय समय पर मुस्लिम समुदाय को अपमानित करने वाले वक्तव्य देते रहते हैं। यह समुदाय असम में जबरदस्त उपेक्षा झेल रहा है।

हाल में असम में कांग्रेस की एक बैठक में एक कांग्रेसी ने ‘आमार सोनार बांग्ला’ गीत गाया। सरमा ने अपनी पुलिस को बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाने के लिए उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा।

शायद सरमा को इस गाने का इतिहास, जिन हालातों में वह रचा गया और उसके भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से रिश्ते के बारे में जरा भी जानकारी नहीं है। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि मूल ‘आमार सोनार’ गीत की केवल शुरूआती 10 पंक्तियों को बांग्लादेश का राष्ट्रगान बनाया गया।

अपनी ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के मुताबिक अंग्रेजों ने सन् 1905 में बंगाल का पश्चिम बंगाल और पूर्व बंगाल में विभाजन कर दिया। जाहिर तौर पर इसका कारण प्रशासनिक बताया गया लेकिन उसका असली प्रयोजन स्पष्टतः भारतीयों को धर्म के आधार पर बांटना था। पश्चिमी बंगाल में हिन्दुओं का बहुमत था और पूर्वी बंगाल में मुसलमानों का। इस विभाजन का भारतीयों ने जी जान से विरोध किया। इसी दौरान गुरूदेव ने बांग्ला गौरव को दर्शाने और बंगभंग का विरोध करने के उद्देश्य से यह गाना लिखा। यह गाना बंगाल विभाजन के विरोध की केन्द्रीय धुरी बना गया और आखिरकार अंग्रेजों को बंगाल को दो हिस्सों में बांटने का अपना फैसला वापिस लेना पड़ा।

यहां यह बताना दिलचस्प होगा कि बंगभंग के खिलाफ चले इस आंदोलन और हिन्दू-मुस्लिम एकता को मजबूती प्रदान करने के लिए राखी बांधने-बंधवाने का अभियान भी चला। भारत के बंटवारे की त्रासदी के बाद पूर्वी बंगाल और पश्चिमी पंजाब पाकिस्तान का हिस्सा बने। पाकिस्तान की सत्ता का केन्द्र पश्चिमी पाकिस्तान था। आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से पश्चिमी पाकिस्तान का बोलबाला रहा आया और इसके नतीजे में पूर्वी पाकिस्तान के निवासी उपेक्षित महसूस करने लगे। घाव पर नमक छिड़कते हुए उर्दू को पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया गया। इससे पूर्वी पाकिस्तान के बांग्ला बोलने वाले मुस्लिम निवासियों में अलगाव की भावना में और इजाफा हुआ। उनमें अलग राष्ट्र बनने की इच्छा जागृत हुई और प्रबल होती गई।

पूर्वी पाकिस्तान को अलग देश बनाने के लिए चले आंदोलन का नेतृत्व मुजीबुर्रहमान ने किया। इन बंगालियों का थीम सांग था ‘आमार सोनार’। टैगोर को पूर्वी पाकिस्तान में अत्यंत श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता था। मुक्ति वाहिनी के आंदोलन और इंदिरा गांधी के दक्ष नेतृत्व में भारतीय सेना के सहयोग से सन 1971 में बांग्लादेश नामक नए राष्ट्र का जन्म हुआ। आमार सोनार गीत की प्रथम दस पंक्तियों को बांग्लादेश के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया। मेरे एक पत्रकार मित्र ने मुझे बताया था कि जब वे बांग्लादेश के शीर्षस्थ नेता से मिलने गए तो उन्हें यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि गुरूदेव का चित्र उनके प्रतीक्षा कक्ष में एक प्रमुख स्थान पर लगा हुआ

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