लखनऊ; (समाज वीकली) आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट की राष्ट्रीय कार्यसमिति द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में “प्राथमिक विद्यालयों का विलय आम बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का षड्यन्त्र है।” उक्त प्रस्ताव में आगे कहा गया है एक तरफ संविधान के प्रावधान के अनुसार बने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ़्त एवं अनिवार्य शिक्षा देने तथा इसे उपलब्ध कराने हेतु उनके निवास के एक किलोमीटर के अंदर विद्यालय स्थापित करने का आदेश है, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यालयों में छात्रों की संख्या कम होने का बहाना ले कर विद्यालयों का विलय करने का आदेश जारी किया है। सरकार की इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष 5000 तथा आगे चल कर 27,000 विद्यालयों का विलय करने की संभावना है। सरकार की इस जन विरोधी कार्रवाही से प्राथमिक विद्यालयों की बच्चों के घरों से दूरी 1 किलोमीटर से बढ़ कर 2-3 किलोमीटर हो जाएगी जिससे छोटे बच्चों का विद्यालय जाना अति कठिन हो जाएगा। इसका सीधा असर दलित, आदिवासी तथा कमजोर वर्ग के बच्चों के स्कूल में प्रवेश पर पड़ेगा। इसका सबसे बुरा असर लड़कियों की शिक्षा खास करके मिर्जापुर तथा सोनभद्र जैसे अति पिछड़े जिलों पर पड़ेगा क्योंकि वे वर्तमान अराजकता के माहौल में पहले ही बहुत असुरक्षित महसूस करती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की यह जनविरोधी कार्रवाही मोदीजी के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे की भी पोल खोल दे रही है। यह भी सर्वविदित है कि किसी भी देश, समाज अथवा परिवार एवं व्यक्ति के विकास में शिक्षा का बहुत बढ़ा योगदान होता है परंतु उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम से आम जन के बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो जाएंगे जोकि किसी भी तरह से व्यक्तिगत अथवा राष्ट्रहित में नहीं है।
अतः आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट उत्तर प्रदेश सरकार के प्राथमिक विद्यालयों के विलय करने के आदेश का विरोध करता है तथा उन सभी राजनीतिक पार्टियों, संगठनों तथा बुद्धिजीवियों के साथ सहमत है जो इस आदेश का विरोध कर रहे हैं।
आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट की राष्ट्रीय कार्यसमिति की ओर से जारी,
एस आर दारापुरी,
राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट ।



