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जंतर मंतर पर सादी वर्दी में बर्बर बल प्रयोग गैरकानूनी

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एस आर दारापुरी, पूर्व आईजी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट

(समाज वीकली)  20 जुलाई को जंतर मंतर  पर आयोजित संसद मार्च  में छात्र छात्राओं और बच्चों पर सादी वर्दी में किया गया बल प्रयोग गैर कानूनी और अवैधानिक है। यह आवश्यकता से अधिक, दंडात्मक एवं दमनकारी है। इससे प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में घायल हुए हैं तथा उनको गंभीर चोटें आई हैं। हद यह है कि वहाँ ड्यूटी पर लगाए गए लोग वर्दी पर नेम प्लेट, रैंक तथा बल के नाम का बैज तक नहीं लगाए थे। दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय भारत सरकार को यह बताना चाहिए कि सादी वर्दी में दमन करने वाले लोग कौन थे और उनमें से कौन पुलिसकर्मी थे कौन नहीं । इन्हें लाठीचार्ज का आदेश देने वाले कौन कौन मैजिस्ट्रेट अथवा पुलिस अधिकारी थे, उनका नाम भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

पुलिस द्वारा प्रदर्शनों आदि के दौरान बल प्रयोग के संबंध में सभी राज्यों की पुलिस के लिए निर्धारित नियमों/आदेशों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इनमें बल की मात्रा, प्रकार, अवधि तथा उद्देश्य को स्पष्ट तौर पर व्याख्यायित किया गया है। इनमें मुख्य तौर पर यह कहा गया है कि बल प्रयोग न्यूनतम, हल्के से भारी, लाठी अथवा गोली को कमर से नीचे मारने तथा प्रदर्शनकारियों को कम से कम चोट पहुंचा कर तितर बितर किया जाना चाहिए। इस की सारी जिम्मेवारी मौके पर उपस्थित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की होती है।

दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर मंतर पर बल प्रयोग के निम्नलिखित पहलुओं पर विचार जरूरी है:

1. सादी वर्दी में पुलिस क्यों ?

जंतर मंतर से प्राप्त वीडियोज में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पुलिस के बहुत सारे कर्मचारी सादे कपड़ों में हाथ में लाठी ले कर भीड़ नियन्त्रण एवं बल प्रयोग कर रहे थे। उनका यह कृत्य पूर्णतया अवैधानिक तथा सुप्रीम कोर्ट एवं विभागीय आदेशों का उल्लंघन है। इसके लिए न केवल संबंधित कर्मचारी बल्कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पूर्णतया जिम्मेदार है। सादे कपड़ों में किसी भी शरारती तत्व द्वारा भीड़ में घुस कर माहौल को बिगाड़ा जा सकता है। इस संबंध में यह भी कहा जा रहा कि वे लोग पुलिस कर्मचारी न हो कर भाजपा के लोग थे।

  1. आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग

    जंतर मंतर पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग के वीडियोज से यह स्पष्ट है कि पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया क्योंकि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे,भाग कर जा रहे लोगों तथा सड़क किनारे खड़े दर्शकों पर भी किया गया। इसमें लाठियाँ बहुत निर्ममता से बरसाई गईं जो कि दंडात्मक एवं दमनकारी पुलिस हिंसा का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त लाठियाँ शरीर के मर्मस्थल जैसे सिर, आँख तथा छाती पर मारी गईं जबकि बल प्रयोग संबंधी निर्देश/ नियम इन्हें कमर के नीचे मारने के हैं ताकि इससे कम से कम चोट लगे तथा प्रदर्शनकारी तितर बितर भी हो जाएं

    3. पुलिस कर्मचारियों द्वारा नेम प्लेट न लगाना

जंतर मंतर से प्राप्त वीडियोज में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पुलिस के बहुत सारे कर्मचारी अपनी वर्दी पर न तो नेम प्लेट लगाए थे और न ही अपने रैंक एवं फोर्स के नाम संबंधी बैज धारण किए थे। यह पूर्णतया अवैधानिक है। ड्यूटी पर वर्दी तथा बैज धारण करने के बारे में सभी राज्यों के पुलिस निर्देशावलियों में इनको जरूरी तौर पर धारण करने के आदेश हैं ताकि संबंधित कर्मचारियों की पहचान पूरी तरह से स्पष्ट रहे। इसके अतिरिक्त सुप्रीमकोर्ट ने डी के बासु मामले में ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिस अधिकारियों के लिए नेम प्लेट, रैंक तथा बल के नाम संबंधी बैज धारण करना जरूरी कहा है। इसमें आगे यह भी कहा गया है कि यदि कोई अधिकारी (विशेषकर कानून व्यवस्था या प्रदशनों के दौरान) अपनी नेम प्लेट हटाता है या छिपाता है, तो इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन और गैर कानूनी माना जाएगा। इसके लिए उसे दंडित किया जा सकता है। इन आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेवारी है।

  1. गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की संबंधित के परिवार वालों को सूचना न दिया जाना

    यह भी बड़े स्तर पर शिकायत प्राप्त हुई है कि दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की सूचना उनके परिवार वालों को नहीं दी जा रही है जिसके उन्हें संपर्क करने में परेशानी हो रही है। दिल्ली पुलिस का यह कृत्य सुप्रीमकोर्ट के डी के बासु मामले में दिए गए निर्देशों की अवहेलना है।

    5. पुलिस द्वारा पथराव

    जंतर मंतर से प्राप्त एक वीडियो में पुलिस वाले प्रदर्शनकारियों पर पथराव करते दिखाई दे रहे हैं। इसकी भी जांच हो कर दोषी कर्मचारियों को दंडित किया जाए।

    6.  जंतर मंतर के पास एक क्षतिग्रस्त कार तथा पत्थरों से लदे एक ट्रक की मौजूदगी

    जंतर मंतर से प्राप्त एक वीडियो में जंतर मंतर के पास एक क्षतिग्रस्त कार तथा पत्थरों से लदे एक ट्रक की मौजूदगी दिखाई दे रही है। इनकी मौजूदगी कई प्रकार के संदेह को पैदा करती है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।

    उपरोक्त संक्षिप्त विवरण से स्पष्ट है कि जंतर मंतर पर पुलिस द्वारा किया गया बल प्रयोग पूर्णतया अवैध, अत्यधिक है। इसके अतिरिक्त वर्दी पर नेम प्लेट न लगाने तथा सादी वर्दी में कर्मचारियों को लगाने के दोषी अधिकारियों को भी दंडित किया जाए। अतः इस मामले की न्यायिक जांच करके दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दंडित किया जाए तथा इसमें घायल व्यक्तियों को उचित इलाज तथा मुआवजा दिया जाए।

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