HOME फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल–यूके (FISI-UK) द्वारा नेहरू सेंटर, लंदन में ‘सभ्यतागत...

फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल–यूके (FISI-UK) द्वारा नेहरू सेंटर, लंदन में ‘सभ्यतागत भारत’ पर अमी गणात्रा का ज्ञानवर्धक व्याख्यान आयोजित

4

समाज वीकली यू के

फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल–यूके (FISI-UK) ने हाल ही में नेहरू सेंटर, लंदन में प्रख्यात लेखिका एवं वक्ता अमी गणात्रा के साथ एक ज्ञानवर्धक एवं रोचक कार्यक्रम का आयोजन किया। “सभ्यतागत भारत: विश्व को क्या समझने की आवश्यकता है” विषय पर उनके व्याख्यान ने श्रोताओं को भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत और आधुनिक विश्व में उसकी प्रासंगिकता से परिचित कराया तथा सार्थक चर्चा को प्रेरित किया।

इस कार्यक्रम में भारतीय एवं ब्रिटिश-भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। यह उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के बीच भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों को समझने की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। खचाखच भरे इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद वीरेंद्र शर्मा, नेहरू सेंटर के निदेशक नाओरेम जे. सिंह, अनेक मेयर, पार्षद, सामुदायिक नेता तथा प्रवासी समाज की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित थीं।

अपने व्याख्यान में अमी गणात्रा ने बताया कि यद्यपि भारत एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में 1947 में स्थापित हुआ, किंतु एक सभ्यता के रूप में उसका इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निरंतरता केवल भारत के विशाल साहित्य, शास्त्रों और दार्शनिक ग्रंथों में ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज के मूल्यों, व्यवहार और सामाजिक परंपराओं में भी आज तक जीवित है।

उन्होंने हिंदू दर्शन और परंपराओं के अनेक उदाहरणों के माध्यम से उन सिद्धांतों को समझाया जो आज भी भारतीय जीवन को दिशा देते हैं। इनमें ‘पंच ऋण’ की अवधारणा विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति पर प्रकृति, पूर्वजों, ऋषियों, समाज और ईश्वर के प्रति दायित्व होता है। उन्होंने बताया कि यह विचार कृतज्ञता, सेवा, कर्तव्य और परस्पर जुड़ाव की भावना को विकसित करता है, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि भारत का सभ्यतागत दृष्टिकोण सदियों से समाज, संस्कृति और सामूहिक पहचान को आकार देता आया है। उन्होंने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे भारत को केवल उसके आधुनिक राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में न देखें, बल्कि विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक के रूप में समझें, जिसके विचार और मूल्य आज भी वैश्विक स्तर पर प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।

प्रश्नोत्तर सत्र भी अत्यंत रोचक रहा। अमी गणात्रा ने श्रोताओं के प्रश्नों का गहन और संतुलित उत्तर देते हुए अनेक नए दृष्टिकोण प्रस्तुत किए, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा। इस संवाद के बाद अनेक प्रतिभागियों ने भारत की सभ्यतागत विरासत के बारे में और अधिक जानने की इच्छा व्यक्त की।

कार्यक्रम का समापन अमी गणात्रा के साथ एक अनौपचारिक संवाद से हुआ, जहाँ उपस्थित लोगों को उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने और चर्चा को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने अपनी नवीनतम पुस्तक “Why Are We This Way? – A Guide to Hindu Shastras” के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें हिंदू शास्त्रों के उन सिद्धांतों और परंपराओं का सरल परिचय दिया गया है जो आज भी भारतीय समाज और चिंतन को प्रभावित करते हैं। उनके व्याख्यान के बाद अनेक श्रोताओं ने इस पुस्तक को पढ़ने तथा कार्यक्रम में उठाए गए विषयों पर और गहराई से अध्ययन करने में विशेष रुचि दिखाई।

ईमेल: [email protected] ; वेबसाइट: www.fisiuk.com

Previous article‘ਰਵਿਦਾਸ ਜੀ ਦੀ ਰੂਹ ਕੁਰਲਾਉਂਦੀ ਹੋਣੀ’