सीजेआई का प्रोटोकॉल तोड़ना और ग्वालियर हाईकोर्ट में बाबा साहब की मूर्ति का विरोध शर्मनाक
जालंधर (समाज वीकली) अंबेडकर मिशन सोसाइटी पंजाब (रजि.) के अध्यक्ष चरण दास संधू और महासचिव बलदेव राज भारद्वाज ने प्रेस के नाम एक सांझे बयान में कहा है कि एक दलित व्यक्ति माननीय भूषण आर.. गवई का भारत की सर्वोच्च न्यायालय में सीजेआई बनना संविधान की ताकत है। माननीय के. जी. बाळकृषणन के बाद माननीय भूषण आर गवई दूसरे दलित व्यक्ति हैं जो भारत की सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने हैं। उन्होंने कहा कि माननीय भूषण गवई जब सीजेआई बनने के बाद महाराष्ट्र के दौरे पर गए तो उनके सम्मान में प्रोटोकॉल को तोड़ना और उधर मध्य प्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट में मनुवादी वकीलों द्वारा बाबासाहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति का विरोध भारत के लिए अत्यंत शर्मनाक बात है। यूएसए की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में बाबासाहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की आत्मकथा ‘वेटिंग फॉर विजा’ टेक्स्ट बुक के तौर पर पढ़ाई जा रही है और हमारे देश में ऐसी जातिगत शर्मनाक हरकतों से दूसरे देशों में भारत की छवि खराब हो रही है। संधू और भारद्वाज ने आगे कहा कि रामकृष्ण सूर्यभान गवई (30 अक्टूबर 1929 – 25 जुलाई 2015), जिन्हें दादा साहब गवई के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, अम्बेडकरवादी आंदोलन के वरिष्ठ नेता और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (गवई) के संस्थापक थे। वह एक अम्बेडकरवादी और बौद्ध थे। वे अम्बेडकर की वैचारिक पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष थे, इस पार्टी के माध्यम से उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में कई कार्य किए। गवई ने बाबासाहेब अम्बेडकर के साथ भी काम किया। वे बिहार, सिक्किम और केरल के तीन राज्यों के राज्यपाल थे, साथ ही उन्होंने भारतीय संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में कार्य किया है। गवई महाराष्ट्र विधान परिषद के 30 साल के सदस्य (एमएलसी) थे, जिसके दौरान उन्होंने परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विपक्ष के नेता के पदों पर कार्य किया। रामकृष्ण सूर्यभान गवई के बेटे न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई 14 मई को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ लेकर वे गणतंत्र के इतिहास में भारतीय न्यायपालिका के शीर्ष पर पहुंचने वाले दूसरे दलित व्यक्ति बन गए। न्यायमूर्ति गवई ने अक्सर भारत के संविधान की महानता के बारे में बात की है, जिसने उन्हें यह मुकाम दिलाया। उन्होंने अपने भाषण में कहा था, “यह केवल डॉ. बी.आर. अंबेडकर के प्रयासों के कारण ही संभव हो पाया है कि मेरे जैसे व्यक्ति, जो एक नगरपालिका स्कूल में एक अर्ध-झुग्गी क्षेत्र में पढ़ता था, इस पद को प्राप्त कर सका।” उन्होंने अपने भाषण का समापन “जय भीम” के नारे के साथ किया था। उन्होंने कहा न तो न्यायपालिका, न कार्यपालिका न ही संसद सर्वोच्च है, बल्कि भारत का संविधान सर्वोच्च है।
बलदेव राज भारद्वाज
महासचिव अंबेडकर मिशन सोसाइटी पंजाब (रजि.)

