लखनऊ (समाज वीकली) एआईपीएफ की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव सहित 27 सदस्यों की न्यायेतर हत्या की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया। हम माओवादी पार्टी की राजनीतिक विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से केंद्र और राज्य सरकारें माओवादियों और निर्दोष आदिवासियों का सफाया कर रही हैं, वह निंदनीय है। यह सर्वविदित तथ्य है कि समाज सेवा में लगे लोगों ने केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से माओवादियों से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया था। बताया जाता है कि माओवादी नेतृत्व ने नागरिक स्वतंत्रतावादियों द्वारा दिए गए सुझाव को स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और माओवादियों के कार्यकर्ताओं की घेराबंदी और हत्या का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
यह उल्लेखनीय है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और असहमति जताने वालों को गिरफ्तार करने और उन पर मनगढ़ंत मामले दर्ज करने की एक बड़ी फासीवादी योजना का हिस्सा है। भीमा कोरेगांव में हुई गिरफ्तारियां और हाल ही में प्रो. अली खान की गिरफ्तारी इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इस सरकार द्वारा आरोपित किए गए कई लोग निर्दोष पाए गए हैं। एआईपीएफ का मानना है कि देश में विकसित हो रही यह फासीवादी प्रवृत्ति लोकतंत्र और राष्ट्र के लिए अच्छी नहीं है।
एआईपीएफ उन सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के साथ है, जो हत्याएं रोकने और समस्या के समाधान के लिए बातचीत शुरू करने का आह्वान कर रहे हैं।
एआईपीएफ की राष्ट्रीय कार्यसमिति की ओर से,
एस.आर. दारापुरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट



