HOME समय के धरातल पर टिका कहानी संग्रह ” समय नहीं है”

समय के धरातल पर टिका कहानी संग्रह ” समय नहीं है”

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पुस्तक मेरी नजर में – समीक्षा।
पुस्तक का नाम: समय नहीं है (कहानी संग्रह)
लेखक : मनोज कुमार प्रीत पृष्ठ 104
मुल्य : 150 रु. प्रकाशक : अमृत बुक्स कैथल एवम प्रीत साहित्य सदन लुधियाना।

तेजिंदर चंडिहोक, एम.ए

तेजिंदर चंडिहोक

हमारे आस पास बहुत सी घटनाएं घटती रहती है और कुछ स्वय हमारे साथ भी घटती हैं। संवेदनशील व्यक्ति इन घटनाओं को महज साधारण न लेकर गंभीरता वश ग्रहण कर लेता है। इन्हीं घटनाओं को अपनी लेखनी का केंद्र बिंदु मनोज ने बनाया है।
सुप्रसिद्ध कथाकार मनोज कुमार प्रीत ने साहित्य को जहां बारह कहानी संग्रह हिन्दी पाठकों को दिए हैं यह कहानी संग्रह समय नहीं है, उन्हीं में से बारहवीं पुस्तक है। देखा जाए तो उस का साहित्य में बहुत विशाल क्षेत्र है। कहानी के साथ उस ने पांच पुस्तकों की संपादना, तीन यात्राएं लिखी हैं और प्रीत साहित्य सदन के नाम से एक संस्था भी चला रहे हैं।
उनकी इस पुस्तक समय नहीं है की बात करें तो इस में केवल छह कहानियां शामिल की गई हैं। कहानियों को पूर्ण विस्तार से लिखा गया है। कहानियों को पढ़ते समय मुझे पंजाबी कहानीकार वरयाम संधू भोला सिंह संघेडा का ध्यान आया जिनकी कहानियां बहुत लंबी होती हैं। मनोज की कहानियां समय के धरा पर टिका हुआ है।
पहली कहानी “बे घर” एक ऐसे इंसान की जीवन धारा का वृत्तांत पेश करती है जो अपनी मात्र भूमि लुधियाना पंजाब यानी भारत छोड़ कर कनाडा, अमरीका बस जाता है मगर वह मात्र भूमि को नहीं भुला पाता है। कहानी का नायक बिट्टू बीमार होने पर अपनी बचपन की यादों में घिरा हुआ है, अपनी और आज की पीढ़ी के अंतर की बात पर विचार कर रहा है। वह सोच रहा है कि समय तो सभी के पास होता है किन्तु हमारी सोच, हमारा स्वार्थ और हमारी जीवन प्रति दौड़ न मालूम हमें कहां ले जा रही है। बिट्टू के वापिस भारत लौटने के विचार पर उस के बच्चे व बीवी भी साथ न आने को कहते हैं। और वह महसूस करता है कि संबंधों के लिए समय कितना जरूरी है।
” तुम ही हो ” और ” कुशी ” कहानियां भी जीवन को रिश्तों पर टिका मानती है। उन यादों को अपने में समाया गया है जो बाद में देर तक पीड़ाजनक हालात पैदा करते हैं। एक प्रेमी प्रेमिका की कहानी को दृष्टांतित किया गया है। किसी प्रिए का चुप साध लेना बहुत घातक होता है। यही कहानी का केंद्र बिंदु है। मगर इन कहानियों में मित्र, प्रेमी या प्रेमिका के बदल जाने का कारण एक आश्चर्य और अस्पष्टता पैदा करता है कि ऐसा क्यों होता है।किसी अपने का बदल जाना और संबंधों, रिश्तों को भुला देना अत्यंत दुखद होता है। मित्रता में अचानक आए बदलाव से मनुष्य को किस रास्ते पे ले जाता है कहानी आप, तुम और तू स्पष्ट कर देती है। कहानी का नायक बदली मित्रता को सहन नहीं कर पाता।
पुस्तक की सिरलेखत कहानी “समय नहीं है” पुस्तक में चौथी और सब से लंबी कहानी है जिस में लेखक ने अवगत कराया है कि समय समय की बात होती है। कभी एक के पास समय नहीं होता और कभी दूसरे के पास। कहानी पुराने और नए समय की बात से शुरू होती है। चतुर्थ कक्षा का अंकुर और अब के अंकुर में कितना बदलाव आया था। पढ़ाई में सब से तेज अंकुर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च पद पर रहते कितने ही घपलों और भ्रष्टों के बाद भी बिल्कुल साफ निकल जाता है। यहां अंकुर की मित्रता मनी और सरबजीत नामक से है। मनी तो उस के साथ है मगर सरबजीत इंग्लैंड में रहता है। कहानी संक्षेप में बताती है कि अगर आप के पास किसी से मिलने का समय नहीं है तो उस के पास भी आप से मिलने का समय नहीं होता। जैसे अंकुर के पास अपने मित्रों से मिलने का समय नहीं होता वैसे ही अंकुश की रिटायरमेंट के बाद उसे के लिए किसी प्रिए को समय नहीं होता।
पुस्तक की पांचवीं कहानी ” स्थाई- आवास ” भी पहली कहानी “बे – घर ” की तरह अपनी मात्र भूमि को छोड़ने की बात करती है। मगर कहानी में पहले रमिता द्वारा अपने पिता को फोन पर वापिस भारत आने की बात की है लेकिन इस कहानी में सस्पेंस को बाद में स्पष्ट किया गया कि कनाडा छोड़ने का कारण क्या था। कनाडा की सरकार स्थाई आवास में अपने देश की नागरिकता को त्यागने का प्रावधान था। रमिता ने कनाडा में जो त्रुटियां हैं उनका भी जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी किसी के पास किसी के लिए समय नहीं है। संबंधों और रिश्तों को लोग भूल चुके हैं। अपने देश और अन्य देशों का अंतर भी पता चलता है।
इस कहानी संग्रह के बारे में बहुत कुछ लिखा जा सकता है किन्तु यहां पर इतना ही काफी है। कहानी संग्रह का विषय और रूपांतर वर्तमान समय के इर्द गिर्द रहता है। फिर भी कई जगह मुझे कुछ संदेह हुआ, जैसे के कहानी में संस्कृत शब्द का लिखना, सोलह कला को चौसठ कला संपूर्ण बताना आदि। फिर भी कहानी संग्रह गंभीरता के साथ पाठकों के बीच रुचि रखता है।

रिटायर्ड ए एस पी
बरनाला।
संपर्क 95010-00224

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