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विनेश फोगट का अपमान और सरकार है मौन

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Vinesh Phogat
     (समाज वीकली)   भारतीय कुश्ती संघ ने विनेश फोगट पर कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोक लगा दी है। सवाल यह उठता है कि भारतीय कुश्ती संघ खिलाड़ियों से है या खिलाड़ी कुश्ती संघ से। कुश्ती संघ तो खिलाड़ियों की सुविधा के लिए बनाया गया है। उसके पुरुष पदाधिकारी, जो न जाने किस योग्यता के आधार पर पद पर बैठे हैं, सिर्फ अपनी कुर्सी की ताकत पर प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ी जो अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुकी है का भविष्य तय कर रहे हैं। ये देश हित में काम कर रहे हैं या किसी बाहूबली के इशारे पर सिर्फ उसके अहंकार की तुष्टि और अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं? सरकार और उसका खेल मंत्रालय मौन सारा तमाशा देख रहा है। खेल मंत्री को तो सिर्फ इसी बात पर कि वे कुश्ती संघ की मनमानी के आगे मजबूर हैं अपना इस्तीफा दे देना चाहिए।
यह कितने शर्म की बात है कि महिला खिलाड़ी विनेश फोगट प्रतियोगिता में भाग लेने ही न आए इसके लिए कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन बृज भूषण शरण सिंह के नंदिनी नगर, गोण्डा स्थित निजी कालेज में किया गया है जिसके खिलाफ छह महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है और विनेश फोगट ने तो अब खुलकर कह दिया है कि बृज भूषण शरण सिंह ने उनके साथ बलात्कार किया है। किसी पीड़िता के लिए यह कितने अपमान की बात है कि उसे मजबूर किया जाए कि वह अपने बलात्कारी के दरवाजे पर जाए। किंतु विनेश फोगट की बहादुरी की दाद देनी पड़ेगी कि वे गांेडा गईं और निडरता से अपनी बात कही। उनके पति की भी तारीफ करनी पड़ेगी कि वे विनेश का पूरा साथ दे रहे हैं और गोंडा में भी उसके साथ खड़े रहे। विनेश कहती है कि अब उन्हें संघर्ष करने की ताकत अपने 10 माह के नन्हे बेटे से मिल रही है।
विनेश फोगट पर अनुशासनहीनता के आरोप लगा कर उन्हें कारण बताओ सूचना दी जा रही है और जिस आदमी ने उनका बलात्कार किया है उसके उपर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा रहा है? विनेश फोगट पर आरोप लगाया जा रहा है कि पेरिस आॅलम्पिक में जिस वजन श्रेणी में वे कुश्ती लड़ना चाहती थीं उसके फाइनल वाले दिन उनका वजन उस श्रेणी के अधिकतम वजन से 100 ग्राम ज्यादा निकला जिसकी वजह से खेल में भाग लेने हेतु वे अयोग्य ठहराई गईं और इस वजह से देश की बदनामी हुई। किंतु फाइनल तक पहुंचने के लिए उन्होंने उसी श्रेणी में और भी तो कुश्ती लड़ी ही थी। आखिरी दिन वे अपने वजन पर नियंत्रण नहीं रख पाईं। यह इतनी बदनामी की बात है या यूनाइटेड वल्र्ड रेसलिंग, विश्व स्तर पर कुश्ती के खेल का संयोजन करने वाली ईकाई के तत्कालीन भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह द्वारा किए गए महिला पहलावानों के यौन शोषण पर भारतीय कुश्ती संध द्वारा 45 दिनों के अंदर चुनाव न करा पाने की स्थिति में उसके निलंबन की धमकी? पूरी दुनिया में बृज भूषण शरण सिंह के कारण भारत, भारतीय राजनीति व भारत के खेल जगत की जितनी बदनामी हुई है शायद हाल की किसी और घटना के कारण नहीं हुई। विनेश फोगट जो अपना वजन फाइनल के दिन कम नहीं कर पाईं उसको सभी विशेषज्ञ कोई बड़ी गल्ती नहीं मानते। कुछ का तो मानना है कि भले ही विनेश को खेलने से वंचित किया गया किंतु फाइनल तक पहुंचने की उपलब्धि के रूप में, जिस प्रक्रिया में उन्होंने जापान की अभी तक की कोई खेल न हारने वाली एक जानी मानी पहलवान को हराया, चांदी का पदक तो दिया ही जाना चाहिए था। बृज भूषण शरण सिंह की वजह से पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हुई किंतु विडम्बना है कि कुश्ती संघ या खेल मंत्रालय ने बृज भूषण शरण सिंह को कभी कोई कारण बताओ सूचना नहीं भेजी कि उसकी वजह से भारत की बदनामी हो रही है। उल्टे बृज भूषण शरण सिंह, जिसके सरकारी घर से भारतीय कुश्ती संघ का दफ्तर चलता था और इसमें खेल मंत्रालय को कोई आपत्ति नहीं थी, ने जब देखा कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण वह अध्यक्ष नहीं रह पाएगा तो उसने अपने ही आदमी संजय सिंह को अध्यक्ष बनवा कर कुश्ती संघ पर अपना वर्चस्व कायम रखा। बृज भूषण शरण सिंह के उपर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप होते हुए भी भारत में उसका बाल भी बांका नहीं हुआ। जिस समय आरोप लगाए गए थे उस समय बृज भूषण सांसद थे। अब उनके बेटे सांसद हैं। केन्द्र सरकार की हिम्मत नहीं है कि वह बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई कार्यवाही करे, गिरफ्तार करना तो दूर की बात है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ बताते हैं कि माफिया राज खत्म हो चुका है। तमाम संदिग्ध अपराधियों को, उनके उपर आरोप सिद्ध होने से पहले ही, मुठभेड़ में मार दिया जाता है या गोली चला कर घायल कर दिया जाता है। कई आरोपियों के घर भी आरोप सिद्ध होने से पहले ही बुलडोजर से गिरा दिए जाते हैं। किंतु उ.प्र. सरकार की भी हिम्मत नहीं कि बृज भूषण के खिलाफ कोई कार्यवाही करे जबकि बृज भूषण खुद सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुका हैं कि उसने एक हत्या की है।
भाजपा महिला सम्मान की बात करती है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है। अभी संसदीय क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने के नाम पर महिला आरक्षण न लागू करा पाने का ठीकरा विपक्ष के सर फोड़ भाजपा महिला मोर्चा की नेत्रियां व कार्यकर्तियां विपक्षी नेताओं के घर जाकर प्रदर्शन कर रही हैं। किंतु अभी तक भाजपा महिला मोर्चा की महिलाएं बृज भूषण के घर नहीं पहुंची हैं। यह बहुत स्पष्ट है कि भाजपा बृज भूषण को बचाना चाह रही है।
यह हमारे लिए बहुत शर्म का विषय है कि इस समय देश में एक महिला विरोधी सरकार है जिसके पीछे एक पितृसत्तातमक सोच वाला संगठन खड़ा है। महिला के साथ होने वाले यौनिक अपराधों की परिभाषाएं कमजोर की जा रही हैं ताकि आरोपियों या जिन्हें सजा हो भी चुकी है उनको राहत दी जा सके। समलैंगिक व खासकर किन्नर समुदाय के अधिकार तो कम कर ही दिए गए हैं। महिला अपनी मर्जी से, खासकर, अंतर्धार्मिक विवाह में, अपना जीवन साथी नहीं चुन सकती। हमारे संविधान में जो बराबरी का अधिकार दिया गया है या डाॅ राम मनोहर लोहिया ने अपनी सप्त क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए नर-नारी समानता को पहला स्थान दिया था की अवधारणा से भाजपा-रा.स्वं.सं. हमें दूर ले जारी है।
लेखकः संदीप पांडेय
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