समाज वीकली यू के
पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए
साउथेम्प्टन की दुखद घटना के बाद कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर सामुदायिक नेता का बयान
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (ग्रेट ब्रिटेन) के महासचिव एवं सामुदायिक नेता सीतल सिंह गिल ने Reform UK के कुछ नेताओं द्वारा अमृतधारी सिखों को कृपाण धारण करने की कानूनी अनुमति समाप्त करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस विषय पर चर्चा तथ्यों और सबूतों के आधार पर होनी चाहिए।
साउथेम्प्टन में 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की दुखद मृत्यु के बाद चल रही बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री गिल ने कहा कि सबसे पहले हमारी गहरी संवेदनाएँ हेनरी के परिवार, मित्रों और प्रियजनों के साथ हैं।
श्री गिल ने कहा:
“हेनरी नोवाक की मृत्यु एक बेहद दुखद घटना है। हम उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। जिसने भी अपराध किया है, उसे कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।
लेकिन किसी एक व्यक्ति की कथित कार्रवाई के आधार पर लाखों कानून का पालन करने वाले सिखों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाना न तो न्यायसंगत है और न ही उचित। सिख समुदाय सार्वजनिक सुरक्षा का पूरा समर्थन करता है और हिंसक अपराधों के खिलाफ है। सार्वजनिक सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता दोनों साथ-साथ चल सकती हैं और चलनी चाहिए।
कृपाण सिख धर्म के पाँच ककारों में से एक है। यह न्याय, जिम्मेदारी, आत्म-अनुशासन और कमजोरों की रक्षा करने के कर्तव्य का प्रतीक है। यह कोई आक्रामक हथियार नहीं है। सिख पीढ़ियों से ब्रिटेन में इसे जिम्मेदारी के साथ धारण करते आ रहे हैं और समाज के हर क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
कृपाण को प्राप्त कानूनी मान्यता कोई विशेष सुविधा नहीं है। यह धार्मिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता और समानता के प्रति ब्रिटेन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। यदि कोई व्यक्ति कृपाण या किसी अन्य वस्तु का दुरुपयोग करके अपराध करता है, तो उसे कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।
यह भी महत्वपूर्ण है कि अदालत की कार्यवाही से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार अभियोजन पक्ष का दावा था कि घटना में धार्मिक कृपाण नहीं, बल्कि एक बड़ा ब्लेड इस्तेमाल किया गया था। इसलिए सार्वजनिक चर्चा तथ्यों और सबूतों के आधार पर होनी चाहिए, न कि धारणाओं या गलतफहमियों के आधार पर।
चाकू से जुड़े अपराध ब्रिटेन के लिए एक गंभीर समस्या हैं, लेकिन ऐसे अधिकांश अपराधों का सिखों या कृपाण से कोई संबंध नहीं होता। इसलिए सरकारी नीतियाँ डर, गलतफहमियों या राजनीतिक लाभ के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर बनाई जानी चाहिए।
सिख समुदाय के अनेक लोगों को चिंता है कि इस तरह की बहस सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह और भेदभाव को बढ़ा सकती है। ऐसे समय में जब ब्रिटेन बढ़ते अपराध, एनएचएस पर दबाव, महंगाई, आवास संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, राजनीतिक नेताओं को इन वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
यह मामला केवल कृपाण या एक कानूनी छूट का नहीं है। यह धार्मिक स्वतंत्रता, कानून के समक्ष समानता, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और ब्रिटेन के लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। हम किसी एक व्यक्ति की गलती को पूरे सिख समुदाय के अधिकारों को सीमित करने का आधार नहीं बनने दे सकते।
पीड़ितों को न्याय अवश्य मिलना चाहिए, लेकिन उसके नाम पर किसी पूरे समुदाय के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।”



