समाज वीकली यू के
डा: हरवंश विरदी, वैसट लन्दन
पिछले एक साल से महाबोधी महाविहार में हम निरंतर जा रहे है। महाविहार के रखरखाव में सबसे महत्वपूर्ण अगर कुछ है तो वह है हमारा पवित्र स्थल “बोधीवृक्ष.”
विगत एक साल से कुछ अजीबसा नजर आ रहा है।
मानो बोधीवृक्ष कुछ कहना चाहता हो ।
कुछ तो गंभीर बात है जो हमसे छिपाई जा रही है।
हम यह साफ देख सकते है की बाकी वृक्षो की तुलना में
इस बार बोधीवृक्ष के पत्ते काफी कम दिख रहे है।
किसी और ने इसपर ध्यान दिया है या नही हमे नही पता पर हम देख पा रहे है, की बोधीवृक्ष के पत्ते काफी कम हो गये है। पिछले साल की तुलना मे। जबकी आजूबाजू वाले पिपल के वृक्षोंपर पत्तो की संख्या बराबर है।
और दुसरी गंभीर बात यह है की इसका तना और टहनियां भी काफी जिर्ण होती जा रही है।
ऐसा किन कारणोंसे हो रहा हैं यह हमे जल्दही पता परना होगा। बोधीवृक्ष की देखभाल करना बीटीएमसी की प्रथम जिम्मेदारी है। देश विदेश से करोडों का अनुदान यहां आता है पर क्या बोधीवृक्ष की देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है या नही यह चिंता का विषय है।
क्या बोधीवृक्ष को हानी पहुचाना बीटीएमसी की मंशा है या और कुछ है ?
बोधगया में कई साल पुराने पेड भी है जो ज्यों के त्यों है पर यह बोधीवृक्ष जो महज 150 साल का है पर जिर्ण सा प्रतित हो रहा है।
जो भगवान बुद्ध के संबोधी का एक मात्र जीवंत प्रतिक है ।
विश्वके सभी बौद्धजनों से गुजारिश है की इस बात पर गौर करे। बीटीएमसी पदाधिकारियों से सवाल करे ।
नमो बुद्धाय जय भिम



