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किसान-मज़दूर अधिकार यात्रा

समाज वीकली यू के

साथियों,
आप सभी को देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई। आज़ादी के बाद से भारत देश ने कई सफलताओं को अर्जित किया और चुनौतियों का सामना किया जिससे देश आगे बढ़ा। परंतु बीते कुछ वर्षों से भारत की अधिकांश जनता के लिए आज़ादी के मायने कम किए जा रहे हैं। मूलभूत ज़रूरतों से जुड़े हक लोगों से लगातार दूर होते जा रहे हैं और नागरिक के रूप में भारत के लोग कमज़ोर हो रहे हैं। हाल में सरकार ने फरमान जारी किया है कि प्राथमिक विद्यालयों को संख्या के आधार बंद किया जाए, वहीं सरकार के ऊर्जा मंत्री का कहना है कि बिजली विभाग का निजीकरण होकर रहेगा। कृषि प्रधान देश में सिंचाई विभाग के वे कर्मचारी जिनके जरिए खेतों तक पानी पहुंचता था, उनकी नौकरियां खत्म कर दी गयीं हैं। दूसरी तरफ कमज़ोर होते ग्राम सभा, लेखपाल, कानूनगो और तहसीलों का चक्कर काटने वाली बड़ी आबादी के जमीन के मुद्दों को हल करने में नाकाम व्यवस्था, लूट और भ्रष्टाचार का पहाड़ खड़ा कर दिया है। हर रोज बलवा-हिंसा के ज्यादातर मामलों के पीछे जमीनी विवाद कारण रहता है। आज़ादी के 78 साल बाद भी सरकारों का जनता के प्रति गैर जवाबदेही और किसान वर्ग को उसके उपज व मेहनत का वाजिब हक़ न मिलना जारी है।

हाई वे-एक्सप्रेस वे, एयरपोर्ट को विकास कहकर किसानों की जमीनें छीनने वाली सरकार को ग्रामीण इलाकों की जर्ज़र सड़कें नहीं दिखतीं। क्योंकि उन पर टोल टैक्स नहीं वसूल करना। निजामाबाद क्षेत्र की कई सड़कें और ज़्यादातर संपर्क मार्ग इतने जर्जर हो चुके हैं कि हर दिन लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। कई-कई जगह सड़कें नदारद हैं, सड़कों पर गड्ढों का अम्बार है और बारिश के इस वक्त में कीचड़ युक्त सड़कों पर पानी भर जा रहा है। लाहीडीह, मुड़ियार जैसी बाज़ारों से गुज़रती सड़कों पर सीवर लाइन न होने के चलते जल जमाव से न सिर्फ राहगीरों को बल्कि स्थानीय लोगों का जीवन दूभर हो गया है। भदुली से माहुल तक की सड़क इतनी जर्ज़र है कि शिवली, अल्लीपुर, रानीपुर, बेगपुर, लाहीडीह, कौड़िया, मुंडियार की जनता लम्बी दूरी तय करके जिले पर पहुँचती है। निज़ामाबाद कस्बे के करीबी गांव त्रिमूहानी की सड़क इसका एक उदाहरण है, उसके बने कई दशक हो गए, कई जगह तो सड़क भी नदारद है। ऐसे ही कई गांव से निकलने वाले संपर्क मार्गों के निर्माण के बाद कोई भी मरम्मत का कार्य कभी भी नहीं किया गया।

हमारे देश में किसानों की स्थिति इस उदाहरण से समझी जा सकती है कि प्रति वर्ष, तीन किश्तों में किसानों को कुल 2 हज़ार रूपये यानि प्रतिदिन औसतन केवल 17 रूपये देने की योजना किसान वर्ग के प्रति सरकार की सबसे बड़ी योजना है। भारतीय किसान की स्थिति राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की हाल में जारी रिपोर्ट में दिखाई देती है, जिसके अनुसार वर्ष 2014-22 के बीच प्रतिदिन 30 किसानों ने आत्महत्या की है। किसानों की वर्षों से चली आ रही सभी उत्पादन पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की मांग को आजतक लागू नहीं किया गया।

किसान-मज़दूर वर्ग की दुर्दशा हमारे आज़मगढ़ जिले में भी देखी जा सकती है जहाँ ज़्यादातर छोटे और सीमांत किसान हैं। जनपद के किसान अपनी आजीविका और अपने भरण-पोषण के लिए किसानी पर निर्भर हैं लेकिन महंगी लागत, जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान और घटते सरकारी समर्थन किसानों को अपनी परंपरागत किसानी छोड़ने पर मजबूर कर रही है। इसके साथ ही सरकारी खाद, बीज विक्रय केंद्र, सरकारी मंडी की कमी, जनपद के किसानों के लिए महत्वपूर्ण तमसा नदी की बदहाली और आज़मगढ़ में बड़ी संख्या में मौजूद सब्ज़ी किसानों की मुश्किल परिस्थिति एक चिंता का विषय है। किसानों के लिए बढ़ती कर्ज़दारी, ज़मीनों का अधिग्रहण, विस्थापन, उर्वरक कृषि भूमि का नुकसान तथा पीढ़ियों से चली आ रही किसान की पहचान के विलुप्त होने का खतरा देश भर में दस्तक दे रहा है।

कृषि प्रधान देश भारत का महत्वूर्ण अंग मज़दूर भी है जिसके बिना देश एक दिन भी आगे नहीं बढ़ सकता है। लेकिन आज़मगढ़ में मज़दूरों की हालत ठीक नहीं है। ग्रामीणों के लिए रोज़गार के रूप में मौजूद मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार बढ़ा है जिससे जनता को काम नहीं मिल रहा है और विवश होकर काम की तलाश में लोग शहर की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी, जर्जर शिक्षा व्यवस्था और अब सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालय मर्जर का फैसला बच्चों, युवाओं और महिलाओं के जीवन को अंधकार में बदल देगा। आज़मगढ़ में विद्युत विभाग के निजीकरण के खिलाफ विद्युत विभाग कर्मचारियों ने पिछले कई महीनों से लड़ाई जारी रखी है। रोज़गार और शिक्षा जैसी मूलभत जरूरतों को बचाने की लड़ाई लड़ना बहुत ज़रूरी है।

देश की आज़ादी दिवस के सप्ताह में आइए हम सब मिलकर किसान-मज़दूर के हक और अधिकारों के लिए इस यात्रा का हिस्सा बनें। पूरी यात्रा का विवरण नीचे दिया गया है-

14 अगस्त 2025 को मुंडियार से मिर्जापुर ब्लॉक तक पदयात्रा
15 अगस्त 2025 को विन्देश्वरी इंटर कालेज तुलसी नगर खंडौरा आजमगढ में स्कूल बचाओ सम्मेलन
16 अगस्त 2025 को शिवली से निजामाबाद तक पदयात्रा
17 अगस्त 2025 को कबीर आश्रम त्रिमूहानी और जन्मस्थली अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध का दौरा

निवेदक- राजीव यादव, वीरेंद्र यादव, राज शेखर, श्याम सुन्दर मौर्या, देवीदत्त यादव, चक्रवर्ती यादव, वासिउद्दीन मुन्ना, परवेज अहमद, मोहम्मद खालिद, गानिम, अनीश, ताबिश, रफ़ात खान, जीशान शेख, बिंद्रेश यादव, रामचंद्र बिंद,नंदलाल यादव, श्यामजीत यादव, प्रोफेसर जीशान, मोहम्मद ईशा, अबू सालिम, अरबाज, साहबदीन, अरमान, एडवोकेट विनोद यादव, हीरालाल यादव, अवधेश यादव, चंद्रशेखर मौर्या, प्रियांस मौर्या, नगेन्द्र मौर्या, शुभम मौर्या, दीपक मौर्या, उजाला, फैज अहमद, अबुल वफ़ा, दीपक यादव, मुन्ना यादव, श्याम नारायण बिंद, सूबेदार गौतम, मेलहू वनवासी, आफताब, अनिल मौर्या, टीलठू मौर्या, जंगलदेव, सर्वेश शर्मा, मनोज यादव, छोटेलाल यादव।

8210437705, 81159 93347, 7985946875
सोशलिस्ट किसान सभा, पूर्वांचल किसान यूनियन, NAPM
जब तक दुखी किसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा

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