HOME धांगर आदिवासियों के सामाजिक अधिकार को सुनिश्चित करे सरकार

धांगर आदिवासियों के सामाजिक अधिकार को सुनिश्चित करे सरकार

16

एआईपीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी ने एसीएस समाज कल्याण वेंकटेश्वर लू से की वार्ता

पूरे प्रदेश में कोल को मिले आदिवासी का दर्जा

लखनऊ, (समाज वीकली) : सोनभद्र की आदिवासी मूल की धांगर जाति के नाम पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर रोक लगाने, भारत सरकार की सूची के अनुरूप ही एससी के जाति प्रमाण पत्र जारी करने और धांगर को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के सवाल पर आज ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी ने अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण श्री वेंकटेश्वर लू से वार्ता की। उनके साथ एआईपीएफ के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर भी रहे। दारापुरी ने इसके अलावा उत्तर प्रदेश की कोल आदिवासी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने, वनाधिकार कानून के तहत पुश्तैनी जमीन पर मान्यता देने और सोनभद्र जनपद समेत प्रदेश के दलित, आदिवासी छात्रों की बकाया छात्रवृत्ति के तत्काल भुगतान के सवाल को भी उठाया और इस संबंध में पत्रक भी दिए। अपर मुख्य सचिव ने आश्वस्त किया कि इन सब सवालों पर विधि के अनुरूप तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

प्रेस को जारी बयान में एआईपीएफ अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति की सूची में कोई भी संशोधन राज्य सरकार, न्यायालय या कोई अभिकरण नहीं कर सकता है। इसके बावजूद पिछले 15 सालों से सोनभद्र की धांगर जाति के साथ अन्याय किया जा रहा है। उनके नाम पर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनाकर पिछड़े वर्ग के लोग सांसद से लेकर नौकरी तक में हिस्सा हड़प रहें हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति शोध संस्थान ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया है कि यह जाति उरांव आदिवासी जाति मूल की है। इसलिए इसे अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल कर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को उसके सामाजिक अधिकार को सुनिश्चित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में लाखों की संख्या में रह रहे कोल आदिवासियों के भी सामाजिक अधिकार नहीं दिए गए हैं।  आदिवासी होने के बावजूद एसटी की सूची में शामिल न करने के कारण वह वनाधिकार कानून से वंचित है। उसके लोगों को सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है और राबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र भी आदिवासियों के लिए आरक्षित नहीं हो पा रहा है। उत्तर प्रदेश के जनजाति शोध संस्थान ने कॉल को एसटी की सूची में शामिल करने की सर्वे रिपोर्ट दी थी जिसके आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कई बार भारत सरकार को संस्तुति भेजी है लेकिन मोदी सरकार इस पर विचार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने वनाधिकार कानून के अनुपालन न होने पर अपर मुख्य सचिव के साथ गहरी चिंता साझा की और चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके में  वन विभाग द्वारा आदिवासियों की जमीन से बेदखली जैसी कार्रवाइयों पर रोक लगाने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हालात यह हैं  कि दलित, आदिवासी छात्रों को छात्रवृत्ति भी नहीं मिल रही है। इस पर भी तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया।

दिनकर कपूर

प्रदेश महासचिव,ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट, उत्तर प्रदेश।

9450153307

Previous articleShaheed Udham Singh: The Avenger of Jallianwala Bagh
Next articleਥਾਣਾ ਦਸੂਹਾ ਦੀ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਕੀਤਾ ਦੋ ਮੁਲਜਮਾਂ ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ