
समाज वीकली यू के
एक बार डॉक्टर अंबेडकर लॉर्ड लिनलिथगो के पास गए और उनसे खुले दिल से शिक्षा संबंधी खर्चो की बातें की। उन्होंने उनसे कहा कि अगर आपको गुस्सा ना आए, तो मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। तो उन्होंने कहा, “हां, पूछिए, अंबेडकर ने पूछा, “क्या यह सच नहीं कि मैं अकेला 500 ग्रेजुएट के बराबर हूं? “हां, मैं मानता हूं।” फिर अंबेडकर ने उनसे पूछा,“ इसका क्या कारण है?” इस पर उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानता।” तब अंबेडकर ने उनसे कहा कि अपनी मेहनत से प्राप्त की हुई मेरी विद्वता मेरी है क्योंकि मैं इस विद्वता के बल पर शासन के किसी भी पद पर बैठ सकता हूं। मुझे ऐसे ही विद्वान चाहिए, जो इसी प्रकार शासन के पदों पर बैठकर मेरे देश के गरीब और मेरे लोगों की देखभाल कर सके। अगर हमारे लोगों की भलाई करनी है तो ऐसे ही लोगों को पैदा करना होगा। केवल क्लर्कों को पैदा करने से क्या बनेगा? अंबेडकर के इस कथन को लॉर्ड लिनलिथगो ने माना और इस वर्ष 16 विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए विद्यालय भेजा।
श्रीमती जसवंत कौर
रिटायर्ड एस पी
बोधिसत्व बाबा साहेब अंबेडकर एजुकेशन सोसायटी
सोसायटी मेंबर ऑफ अमृतसर यूनिट
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