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तमिलनाडु में क्रांती और प्रति-क्रांतीः

प्रोफे. श्रावन देवरे,

समाज वीकली यू के

तमिलनाडु में क्रांती और प्रति-क्रांतीः
ब्राह्मणवादी दिमक विजय के कंधे पर बैठकर तमिलनाडु की खुशहाल ज़िंदगी कुतर-कुतर के बर्बाद कर देगा!

– प्रोफे. श्रवन देवरे
मोबाईल: 8177 86 1256

(पार्ट-4)

भारतीय राजनीति में, अगर किसी पार्टी में प्रोग्रेसिव या क्रांतिकारी विचारों का मेल नहीं है और उसके पास ऑर्गेनाइज़ेशनल काम भी नहीं है, तो ऐसी प्र-स्थापित विचारों वाली पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ये करोड़ों रुपये सिर्फ़ वोट खरीदने के लिए ही नहीं, बल्कि माफिया, गुंडों और साज़िश करने वाले बुद्धिजीवियों को खिलाने के लिए भी खर्च किए जाते हैं। ब्राह्मणवादियों ने प्रशांत किशोर नाम का एक ‘चुनावी-भगवान’ बनाया है। इस चुनावी भगवान के पास सभी प्र-स्थापित राजनीतिक पार्टियों से ऑफ़र्स आते रहते हैं, इससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसी एक पार्टी के लिए चुनावी रन-नीति बनाने के लिए उसे कितने करोड़ रूपये दिए जाते होंगे?

मैं पिछले तीसरे पार्ट से एक लाइन फिर से कोट करूँगा- ‘‘राजनीतिक रूप से महत्वाकांक्षी लोग कभी अपनी जेब से पैसे खर्च करके राजनीति नहीं करते।’’ तो इन प्र-स्थापित राजनीतिक पार्टियों को चुनाव लड़ने के लिए करोड़ों रुपये कौन देता है? यह राज़ मुझे मेरे एक कुंभार-OBC पत्रकार ने बताया था। बेशक, वह इस लेन-देन में एक बड़े कैरियर का काम करता है। ये करोड़ों रुपये देश और विदेश के उद्योगपतियों-पूंजीपतियों द्वारा चलाए गए हवाला रैकेट से कुछ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के ज़रिए आते हैं और चुनाव से ठीक पहले भारत की पॉलिटिकल पार्टियों को बांटे जाते हैं। बेशक, कुछ तथाकथित प्रोग्रेसिव-फुले अंबेडकरवादी पार्टियां जो ब्राह्मण-क्षत्रिय जातियों की पार्टियों को सत्ता में बिठाने के लिए वोट-कटवा का काम करती हैं, उन्हें भी अपनी काबिलियत के हिसाब से पैसा मिलता है। भारत में हवाला बांटने के कंट्रोल रूम में संघ के भक्त हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक को कटवाने के लिए संघ-BJP ने हुमायूं कबीर को एक हजार करोड़ रुपये दिए, यह पैसा कहां से आया, इसका जवाब इस तरह है।

तमिलनाडु में विजय की कोई आइडियोलॉजिकल-पॉलिटिकल विरासत नही है और ना कोई इतिहास है। कोई उद्योगपती या पूंजीपती (Capitalist) सिर्फ पार्टी बनाने भर से विजय के नए चेहरे पर करोड़ों रुपये क्यों लगाएगा? उद्योगपती या पूंजीपती तभी अपना पैसा इन्व्हेस्ट करते है, जब नुकसान कम और फायदा ज्यादा होने की गॅरंटी हो। कोई वैचारिक विरासत या इतिहास न होने के बावजूद विजय ने नयी पार्टी बनाईतुरंत चुनाव लड़े गए और तुरंत सत्ता हथिया ली गई! इसका मतलब है कि विजय को भी हुमायूं मुसलमान की तरह करोड़ों रुपये दिए गए हैं, तो इसके पीछे के कारणों को तलाशना होगा।

रजनीकांत और कमल हासन, जो संघ के पहले पालतू थे, करोड़ों रुपये देने के बाद भी बुरी तरह फेल हो गए। उससे सीखकर, संघ-RSS को एक नया बलि का बकरा मिला, विजय। और वह पहले ही चुनाव में सफल हो गया। इसके पीछे असली कारण यह है कि रजनीकांत और कमल हासन के पीछे अपनी जाति का कोई वोट बैंक नहीं था और ना ही उनके धर्म का वोटबँक। इसलिएसुपरस्टार होने के बावजूद वे फेल हो गए। मगर विजय के पीछे अपनी जाति और धर्म का वोट बैंक हैऔर वह उसमें करोड़ों रुपये डालने के बाद सफल हुआ है। चूंकि विजय के पास कोई आइडियोलॉजिकल सपोर्ट नहीं था, इसलिए संघ-बीजेपी ने उसे कैपिटलिस्ट के ज़रिए भारी फाइनेंशियल मदद दी!

विजय की सफलता से सबसे ज़्यादा खुश कौन था? क्या बीजेपी? बीजेपी खुश तो हुई होगी क्योंकि संघ-बीजेपी की यह साजीश थी। लेकिन वे विजय से बहुत दूरी बनाए हुए हैं। क्योंकि सेफ दूरी बनाए रखना भी साज़िश का हिस्सा है। लेकिन कांग्रेस विजय की जीत से इतनी खुश क्यों होगी? कॉंग्रेस तो हमेशा डी.एम.के. (DMK) पार्टीसे दोस्ती (Alliance) बनाकर चुनाव लढता है। खुदके पार्टी अलायन्स को पराजीत करनेवाली दुश्मन पार्टी की जीत पर कॉंग्रेस इतनी खुश क्यों थी? विजय की पार्टी (TVK) की जीत पर कांग्रेस इतनी खुश थी कि नतीजों वाले दिन उसने जोश में आकर विजय को सरकार बनाने के लिए बिना शर्त सपोर्ट दे दियाऔर वो भी विजय के बिना मांगे! बिना मांगे सपोर्ट देने वालों में पहला नाम शरद पवार का है और अब दूसरा नाम राहुल गांधी का है! दोनों ही कांग्रेसी हैं! पहले वाले ने 2014 में महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सीधे BJP को सपोर्ट किया था और दूसरे वाले ने अब सीधे संघ-BJP की साज़िश का सपोर्ट किया है। तमिलनाडु में कांग्रेस के सभी पांच MLA को DMK कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर दौडा-दौडाकर पीटा है। पेरियार के विचारों से गद्दारी करने की यह सज़ा कांग्रेस को मिलनी ही थी। लेकिन अगर कांग्रेस के MLAs पिटने के बावजूद विजय को सपोर्ट कर रहे हैं, तो गंभीरता से सोचना चाहिए।

तमिलनाडु में संघ-BJP की केंद्र सरकार का बनाया हुआ गवर्नर है। अगर विजय संघ-BJP की साज़िश का हिस्सा है, तो संघ-BJP के गवर्नर को विजय को तुरंत मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला देनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गवर्नर ने विजय को सरकार बनाने के लिए चार चक्कर क्यों लगवाए? क्या एक साज़िश के तौर पर सेफ़ डिस्टेंस बनाए रखने के लिए? यह सच है, लेकिन एक बड़ा कारण और भी है। कॉंग्रेस के 5 MLAs के सपोर्ट के बाद भी विजय बहुमत में नहीं पहुँचे। दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के चार MLAs का साथ ज़रूरी था। इसमें जयललिता की पार्टी AIADMK ने स्टालिन की DMK पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने का ऐलान कर दिया। नैरेटिव यह भी है कि कम्युनिस्ट पार्टियाँ आमतौर पर धोखा नहीं देतीं। इसलिए संघ-BJP के गवर्नर को शक था कि विजय की सरकार विश्वास मत जीत पाएगी या नहीं। संघ-BJP को पता है कि पेरियारवाद के खिलाफ़ साज़िशें तभी सफल की जा सकती हैं जब विजय की सरकार पाँच साल तक चले। इसलिए गवर्नर ने विजय को बार-बार कम्युनिस्ट पार्टियों के MLAs के पास भेजा। कम्युनिस्टों का साथ मिलने के बाद ही गवर्नर ने विजय को शपथ लेने दी।

तमिलनाडु में कांग्रेस, कम्युनिस्ट, आंबेडकरवादी और दूसरी छोटी पार्टियों के जो 7-8 MLAs चुनकर आते हैं, वे सिर्फ़ DMK पार्टी के साथ उनके गठबंधन की वजह से ही चुनकर आते हैं! BJP का जो एकमात्र MLA चुनाव जीता है, वह भी सिर्फ़ AIADMK पार्टी के साथ उनके गठबंधन की वजह से ही चुनकर आया है! पेरियारवाद के क्रांतिकारी बरगद के पेड़ पर पलने वाले इन परजीवी बांडगूळ (Parasites) ने पेरियारवाद को धोखा दिया और संघ-BJP के पालतू विजय की सरकार बनाने का समर्थन किया। इससे अंदाज़ा लगता है कि यह कितनी बड़ी साज़िश है।

विजय ने चुनाव के समय पहले बाबासाहेब की फ़ोटो दिखाई और फिर मस्जिद, गणपति और चर्च की मिली-जुली फ़ोटो दिखाई। इससे हमें अंदाज़ा हो गया कि उनकी पॉलिटिक्स किस दिशा में जा रही है। वह खुलेआम जाति और धर्म की नुकसान पहुँचाने वाली पॉलिटिक्स कर रहे हैं और हम यह भी अंदाज़ा लगा सकते हैं कि भविष्य में इसके क्या नतीजे होंगे। असेंबली के पहले ही दिन विजय ने जाति और धर्म की इस नुकसान पहुँचाने वाली पॉलिटिक्स की एक झलक दिखा दी। असेंबली में पहले ही दिन विजय ने अपने ऑफ़िस के बहुत महत्वपूर्ण और स्ट्रेटेजिक OSD पोस्ट पर एक संघी-ब्राह्मण पांडे-ज्योतिष को अपॉइंट किया। विजय की इस ब्राह्मणवादी साज़िश को DMK के अपोजझिशन लीडर उदयनिधि और अंबेडकरवादी डॉ. थिरुवलन की पार्टी के दो MLA ने तुरंत पहचान लिया! पेरियारवादी और अंबेडकरवादी MLAs के कड़े विरोध के सामने गद्दार विजय ने घुटने टेक दिए और उस संघी-ब्राह्मण ज्योतिषी को तुरंत OSD पोस्ट से हटा दिया। यह ज्योतिषी विजय की बड़ी चुनावी मीटिंग्स का मुहुर्त (Auspicious Moment) बता रहा था। इसी ज्योतिषी ने गवर्नर को शपथ ग्रहण समारोह शुभ मुहूर्त के लिए टालने के लिए मजबूर किया था।

विजय ने जाति और धर्म की अपनी विनाशकारी राजनीति की दिशा साफ कर दी है। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब की फोटो और एक मस्जिद, गणपति और एक चर्च की एक साथ फोटो दिखाकर दलितों, मुसलमानों, ब्राह्मणों और ईसाइयों के वोट लिए, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने एक ब्राह्मण ज्योतिषी को नियुक्त करके अपना करियर शुरू किया। विजय ने अपने पार्टीसे कितने ब्राह्मण MLAs चुनके लाये हैं और उनमें से कितनों को मंत्री बनाया है, यह मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं है। संघ-RSS की ताकत राजनीतिक पदों से नहीं आती है। संघ प्रशासनिक शक्ति के माध्यम से अपने लक्ष्य हासिल करता है। अब OSD पद की नियुक्ति से एक बात पक्की हो गई है कि तमिल प्रशासन में रणनीतिक और महत्वपूर्ण पदों पर संघी-ब्राह्मणों की बड़े पैमाने पर लैटरल एंट्री होगी और प्रशासन के माध्यम से तमिलनाडु में सांप्रदायिक और धार्मिक दंगे-फसाद करवाने की साजिशे रची जाएंगी।

तमिलनाडु को छोड़कर दूसरे राज्यों से हर दिन कई खबरें आती हैं, जिनमें से कम से कम 2-3 खबरें हिंदू-मुस्लिम टकराव की जरूर होती हैं! और ये खबरें बार-बार दोहराई जाती हैं और दिन भर दिखाई जाती हैं। पेरियारवाद के युग मे पिछले 60 सालों में तमिलनाडु में जाती के नामसे एक भी झगडा या धार्मिक दंगा-फसाद नहीं हुआ है। राजीव गांधी हत्याकांड में हुए बम धमाकों को छोड़ दें तो पिछले 60 सालों में तमिलनाडु में एक भी बम धमाका नहीं हुआ। लेकिन अब ब्राह्मण संघी ज़माने में विजय के कंधों पर बैठकर तमिलनाडु से हर दिन धार्मिक दंगेजाति-पाति के झगड़े और बम धमाकों की खबरें आएंगी और 4-4 दिनों तक बार-बार टीवी पर दिखाई जाएंगी!

पतवार में एक छोटा सा छेद भी बड़े जहाज़ को डुबो सकता है। बिस्तर में एक छोटासा खटमल भी आपकी नींद हराम सकता है। एक छोटा सा कीड़ा पूरे महल को तबाह कर सकता है। इसीलिए स्टालिन की पार्टी ने ब्राह्मणों को टिकट देने से मना कर दिया। स्टालिन की पार्टी ने ब्राह्मणोंको कभी भी MLA नहीं बनाया और ना ही किसी ब्राह्मण को मंत्री बनाया। तात्यासाहब महात्मा जोतीराव फुलेजिन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दि थी की, “मेरी लाश पर किसी ब्राह्मण की परछाई भी मत पड़ने देना।” स्टालिन की पार्टी तात्यासाहब महात्मा जोतीराव फुले की असली वारीस है क्यों की स्टालिन ने अपने पार्टी पर कभी भी ब्राह्मण की परछाई नही पडने दी। ब्राह्मण विरोधी पेरियारवादी राजनीति का डर तमिलनाडु की सभी छोटी-बड़ी पार्टियों पर असर डालता है। इसलिए, विजय की पार्टी को छोड़कर, बाकी सभी अंबेडकरवादी, ब्राह्मणवादी कांग्रेस-BJP और लेफ्ट-कम्युनिस्ट पार्टियों ने ब्राह्मणों को MLA टिकट देने की हिम्मत नहीं की। BJP, जिसे शुद्ध ब्राह्मणों की पार्टी कहा जाता है, उसने एक भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। केवल राजनिती को ब्राह्मण-मुक्त बनाकर ब्राह्मणवाद खतम नही किया जा सकता, बल्कि प्रशासन और दूसरे सभी ज़रूरी धार्मिक-आर्थिक क्षेत्रों में भी ब्राह्मणों का वर्चस्व (Dominance) तोड़ना ज़रूरी है। तभी वह राज्य सही मायने में ब्राह्मण-मुक्त राष्ट्र या ‘पूरी तरह से गैर-ब्राह्मण राष्ट्र’ के तौर पर जाना जा सकता है। DMK. पार्टी ने यह किया। इस बात का ध्यान रखा गया कि तमिलनाडु के प्रशासन (Administration) में ब्राह्मण अधिकारियों की संख्या ब्राह्मण आबादी की संख्या से (प्रतिशत से) ज्यादा ना हो। स्टालिन सरकार ने राज्य में EWS रिज़र्वेशन देने से मना कर दिया थाक्योंकि उन्हें डर था कि प्रशासन (Administration) में ब्राह्मण अधिकारियों की संख्या बढ़ जाएगी। लेकिन अब विजय के कंधों पर बैठकर तमिलनाडु के शासन और प्रशासन (Administration) में ब्राह्मणों की संख्या भी बढेगी और उनकी षड्यंत्रकारी दखलंदाज़ी भी बढेगी। तमिलनाडु की खुशहाल ज़िंदगी को ब्राह्मण नामकी दिमक कुतर-कुतर के खा जाने वाली है।

किसी भी सोशियो-पॉलिटिकल घटना के कम से कम दो पहलू होते हैं। अब तक, हमने तमिलनाडु में हाल की काउंटर-रेवोल्यूशन का एक पहलू देखा है, यानी विजय का पहलू। अगले आर्टिकल में, हम पेरियारवाद की सीमाओं और DMK की पॉलिटिकल गलतियों का एनालिसिस करेंगे। तब तक, सत्य की जय हो!

-प्रोफे. श्रावन देवरे,
OBC पॉलिटिकल अलायंस,
मोबाइल- 81 77 86 12 56

ज़रूरी सूचना- 1) आर्टिकल का यह चौथा हिस्सा (P4) ‘बहुजन सौरभ’ के 23 मई 2026 के इश्यू में पब्लिश हुआ है।

2) अगर आपको इस आर्टिकल की मराठी pdf (P4) फाइल चाहिए, तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-  https://drive.google.com/file/d/1JXh-JtCnXByBFggN60Utaa9fOrKHjl2r/view?usp=drive_link

3) इस आर्टिकल की हिंदी pdf (P4) फाइल के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-  https://drive.google.com/file/d/1Ynao9eWNDWd0qEdxkcWsBca34gZztlzV/view?usp=drive_link

4) जिनको यह विचार ब्रीफ में हिंदी में सुनना है वो बहुजन-85 चैनल की VDO लिंक क्लिक करें- लिंक-

https://youtu.be/3jDC9Si3UAQ?si=T4GQ05SbWZ09mGLM

 

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