समाज वीकली यू.के.
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (GB) ने यूके सरकार की प्रस्तावित “Earned Settlement” इमिग्रेशन योजना को लेकर चिंता जताई है और 120 से ज्यादा प्रवासी, सामुदायिक और सामाजिक संगठनों के साथ अपना समर्थन व्यक्त किया है, जिन्होंने इन प्रस्तावों पर सवाल उठाए हैं।
ये प्रस्ताव अभी कानून नहीं बने हैं, लेकिन चर्चा चल रही है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ प्रवासी परिवारों को यूके में स्थायी सेटलमेंट पाने के लिए पहले से ज्यादा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में यह समय लगभग 10 साल से बढ़कर 20 साल तक हो सकता है, खासकर अगर परिवारों ने कानूनी तौर पर सरकारी आर्थिक सहायता ली हो।
शोध के अनुसार लगभग 13.5 लाख लोग इस समय सेटलमेंट के रास्ते पर हैं — जिनमें 3 लाख से ज्यादा बच्चे शामिल हैं — और ये बदलाव लागू होने पर प्रभावित हो सकते हैं। यह भी अनुमान है कि 2 लाख से ज्यादा लोग जो अभी 10 साल के सेटलमेंट रास्ते पर हैं, उन्हें और ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है।
एसोसिएशन को चिंता है कि अगर सेटलमेंट को आय या पैसों से जोड़ा गया, तो एक दो तरह की इमिग्रेशन व्यवस्था बन सकती है — जहां ज्यादा कमाने वालों के लिए रास्ता आसान हो और मेहनत करने वाले लेकिन कम कमाने वाले लोगों के लिए मुश्किल।
इसका असर खास तौर पर केयर वर्कर, ट्रांसपोर्ट, हॉस्पिटैलिटी, सफाई, गोदाम, डिलीवरी और NHS सपोर्ट स्टाफ जैसे जरूरी काम करने वाले लोगों पर पड़ सकता है, जो समाज में अहम योगदान देते हैं।
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (GB) के जनरल सेक्रेटरी सीतल सिंह गिल ने कहा:
“सेटलमेंट का फैसला लोगों की मेहनत और समाज में योगदान के आधार पर होना चाहिए, सिर्फ उनकी कमाई के आधार पर नहीं। कई जरूरी काम करने वाले लोग ज्यादा पैसा नहीं कमाते, लेकिन उनका योगदान बहुत बड़ा है।”
उन्होंने आगे कहा:
“हम चाहते हैं कि कोई भी बदलाव करने से पहले प्रवासी समुदायों से सही तरीके से बातचीत की जाए, ताकि मेहनतकश परिवारों के साथ अन्याय न हो।”
सरकार से हमारी अपील
हम सरकार से अपील करते हैं कि भविष्य में सेटलमेंट से जुड़े किसी भी बदलाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए। ऐसा सिस्टम होना चाहिए जिसमें मेहनती परिवारों के साथ न्याय हो और उनकी आर्थिक स्थिति उनकी सुरक्षा का एकमात्र आधार न बने।
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