HOME *त्रैविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा / वैशाख पूर्णिमा महोत्सव पर अमृतसर बौद्ध विहार...

*त्रैविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा / वैशाख पूर्णिमा महोत्सव पर अमृतसर बौद्ध विहार में भव्य धम्म देशना का आयोजन*

4

समाज वीकली यू के

अमृतसर, 2 मई — कोट खालसा (सूरी अमृतसर) स्थित डॉ. बी. आर. अंबेडकर बोधिसत्व बुद्ध विहार, पुलिस चौकी के निकट, त्रैविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक भव्य धम्म देशना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह अमृतसर की यूनिट में पहली बार हुआ। बोधिसत्व बाबा साहेब अंबेडकर सोसायटी यूनिट अमृतसर की संपूर्ण टीम ने अल्प समय के भीतर इसे कामयाब करने में पूरी मेहनत तथा समर्पण से कार्य किया।पूरी टीम बधाई की पात्र है। यह आयोजन विहार के संस्थापक रामपाल जी की अगुवाई में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में बौद्ध धम्म के उपासकों एवं स्थानीय निवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि तथागत गौतम बुद्ध ऐसे महान महामानव थे, जिनका जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण—तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए। इसी कारण इस दिन को “त्रैविध पावनी पूर्णिमा” के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है।

कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना से हुई, जिसमें उपस्थित धम्म बंधुओं ने त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण किए। उपासिका सिमरन बौद्ध जी ने अपनी प्रभावशाली धम्म देशना के माध्यम से बुद्ध की शिक्षाओं को सरल और तर्कपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करते हुए पंचशील के महत्व को समझाया तथा उनके पालन का संदेश दिया।

उन्होंने बुद्ध के चार आर्य सत्यों की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन में दुःख है, दुःख का कारण है, दुःख का निवारण संभव है और उसके निवारण का मार्ग भी है। यदि कोई व्यक्ति तर्क और समझदारी के साथ अपने जीवन का विश्लेषण करे, तो वह अपने दुःख के कारण को पहचानकर उससे मुक्ति प्राप्त कर सकता है। यह प्रत्येक व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी है, इसमें किसी अलौकिक शक्ति की भूमिका नहीं होती।

उन्होंने आगे कहा कि बौद्ध धर्म नैतिक मूल्यों और मानवता पर आधारित है। हमें दूसरों के साथ वही व्यवहार करना चाहिए, जिसकी हम अपने लिए अपेक्षा रखते हैं। बुद्ध के करुणा, मैत्री, शील और प्रज्ञा के सिद्धांत आज भी मानव समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।

समारोह में यह भी संदेश दिया गया कि बौद्ध धर्म में जात-पात के लिए कोई स्थान नहीं है और सभी मनुष्य समान हैं। व्यक्ति की श्रेष्ठता या हीनता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से निर्धारित होती है। इस अवसर पर विश्व शांति, सुख और समृद्धि के लिए मंगलकामनाएं की गईं। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व को युद्ध नहीं, बल्कि बुद्ध के मार्ग की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन अश्वनी बौद्ध जी ने मंच सचिव के रूप में कुशलतापूर्वक किया।

इस अवसर पर डॉ. बरिंदर सियान जी, डॉ. अमर कटारिया जी, डॉ. कुलदीप सिंह जी, एडवोकेट अंकुश जी और एडवोकेट दीपक कुमार जी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अंत में धम्म उपासक इंस्पेक्टर जगतार सिंह जी ने सभी आगंतुकों और सहभागियों का धन्यवाद करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। स्थानीय स्कूल की मैंबरशिप चालू है।जल्द ही जालंधर हेड ऑफिस के अधिकारियों से मिल कर स्थानीय टीम का गठन किया जाएगा।

Previous articleਸਰਕਾਰੀ ਸੀਨੀਅਰ ਸੈਕੰਡਰੀ ਸਕੂਲ, ਬੋਹਣ ਨੇ ਬਿਜ਼ਨਸ ਬਲਾਸਟਰ ਮੇਲਾ ਸਫਲਤਾਪੂਰਵਕ ਆਯੋਜਿਤ ਕੀਤਾ
Next articleਤ੍ਰੈਵਿਧ ਪਾਵਨੀ ਬੁੱਧ ਪੂਰਨਿਮਾ ਮੌਕੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਬੌਧ ਵਿਹਾਰ ਵਿੱਚ ਭਵਿਆ ਧੰਮ ਦੇਸ਼ਨਾ ਦਾ ਆਯੋਜਨ