
भारतीय मजदूर सभा (ग्रेट ब्रिटेन) की ओर से सीतल सिंह गिल, महासचिव का बयान
समाज वीकली यू के- भारतीय मजदूर सभा (ग्रेट ब्रिटेन) कंज़र्वेटिव पार्टी द्वारा हाल ही में घोषित नई आव्रजन (इमिग्रेशन) नीति के तहत प्रस्तावित “रिमूवल्स फोर्स” की योजना की कड़ी निंदा करती है।
कंज़र्वेटिव पार्टी के वार्षिक सम्मेलन में घोषित इस योजना के अनुसार, नई “रिमूवल्स फोर्स” को व्यापक अधिकार दिए जाएंगे — जिनमें बिना अनुमति चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) तकनीक का उपयोग, पुलिस द्वारा हर व्यक्ति की इमिग्रेशन स्थिति की जांच, और हर साल लगभग 1.5 लाख लोगों को हिरासत में लेकर निर्वासित करने का लक्ष्य शामिल है।
कंज़र्वेटिव पार्टी का कहना है कि यह कदम “अवैध आव्रजन” को रोकने और ब्रिटेन की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए हैं। लेकिन भारतीय मजदूर सभा (ग्रेट ब्रिटेन) का मानना है कि यह रुख बेहद खतरनाक और अन्यायपूर्ण है। इससे ब्रिटेन एक निगरानी राज्य (सर्विलांस स्टेट) बन जाएगा, जहाँ लोगों को उनकी त्वचा के रंग, भाषा या नस्लीय पहचान के आधार पर निशाना बनाया जाएगा। यह वह ब्रिटेन नहीं है जो न्याय, समानता और मानवाधिकारों के मूल्यों पर गर्व करता है।
दशक भर पहले, भारतीय मजदूर सभा (ग्रेट ब्रिटेन) ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के आव्रजन कानून “आव्रजकों की स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए खतरा हैं, नस्ली संबंधों को बिगाड़ेंगे, व्यक्तिगत मानवाधिकारों का उल्लंघन करेंगे और वर्तमान व भविष्य के प्रवासियों के लिए शत्रुतापूर्ण माहौल बनाएंगे।” अफसोस की बात है कि आज यह चेतावनी पूरी तरह सच साबित हो रही है। कंज़र्वेटिव पार्टी का यह नया प्रस्ताव उसी शत्रुतापूर्ण एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
अगर यह नीतियाँ लागू होती हैं, तो इनका नुकसान केवल अवैध प्रवासियों तक सीमित नहीं रहेगा — बल्कि दक्षिण एशियाई, अफ्रीकी और कैरेबियाई मूल के हजारों मेहनतकश परिवारों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे समाज में भय, भेदभाव और सरकारी संस्थाओं के प्रति अविश्वास बढ़ेगा।
ब्रिटेन की असली ताकत उसकी विविधता, न्यायप्रियता और मानव गरिमा के सम्मान में निहित है। ऐसी नीतियाँ जो समाज में विभाजन और घृणा फैलाती हैं, वे देश की आत्मा और लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध हैं।
भारतीय मजदूर सभा (ग्रेट ब्रिटेन) सभी राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों, सामुदायिक संगठनों और मानवाधिकार समर्थकों से अपील करती है कि वे इन विभाजनकारी प्रस्तावों का विरोध करें। आव्रजन नीति करुणा, सच्चाई और हर व्यक्ति के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए — न कि डर, शत्रुता और नस्लीय पहचान के आधार पर।


