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तमिलनाडु में क्रांती प्रति-क्रांती

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कई क्रांतिकारी कानूनों का असल में लागू होना!

प्रोफे. श्रवण देवरे

(भाग-2)

    (समाज वीकली)   OBC नेता करुणानिधि और स्टालिन (नाई-सेन) ने पेरियार के ब्राह्मण-विरोधी सांस्कृतिक संघर्ष को और तेज़ कर दिया। सामी पेरियार के क्रांतिकारी ब्राह्मणवादविरोधी फुले आंदोलन से निकले क्रांतिकारी शासकों ने अपने 59 साल के शासन में जाति के आधार पर ये ब्राह्मणवादविरोधी फैसले लिए:

DMK और AIADMK दोनों ही सामी पेरियार और उनकी ‘ब्राह्मणवादविरोधी’ विचारधारा को पार्टी का मुख्य आधार मानते हैं। हालांकि AIADMK के प्रमुख M.G. रामचंद्रन केरलम के नायर जमीनदार (क्षत्रिय) जातीसे आते है और उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी जयललिता जातीसे ब्राह्मण हैं, लेकिन उनकी पार्टी में OBC का दबदबा है। तमिलनाडु में दोनों पार्टियां बारी-बारी से सत्ता में आती हैं। इन दोनों पार्टियों ने अपने-अपने राज में ब्राह्मण खेमे (छावणी-कॅम्प) को हराने के लिए ब्राह्मण जाति के खिलाफ कई क्रांतिकारी और आक्रामक कानून बनाए हैं। इन दोनों पार्टियों की वजह से तामीळनाडू मे 1) रिज़र्वेशन की 50 परसेंट की लिमिट हमेशा के लिए खतम हो गयी और टोटल रिझर्वेशन 69 परसेंट तक पहुँच गया। 2) भारत का संविधान, जो 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ, उसमें धर्म के आधार पर रिज़र्वेशन देने का कोई प्रोविज़न नहीं है, लेकिन तमिलनाडु की सरकार ने भारतीय संविधान के आगे जाकर मुस्लिम रिज़र्वेशन जारी रखा है और न तो केंद्र सरकार मे और न ही सुप्रीम कोर्ट में इस धार्मिक रिज़र्वेशन को रद्द करने की हिम्मत है। 3) भारतीय संविधान में OBCs के लिए कोई रिज़र्वेशन नहीं है, सिर्फ़ आर्टिकल 340 में रिज़र्वेशन देने की सिफ़ारिश की गई है। तमिलनाडु सरकार ने संविधान को नज़रअंदाज़ करते हुए अपने 1921 और 1927 के कानूनों को कायम किया है और OBCs को रिज़र्वेशन देना जारी रखा है। 4) डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने संविधान मे दलित-आदिवासियों को रिझर्वेशन दिया। मात्र 6 महिने भी नही हुये तभी सुप्रीम और हाई कोर्ट ने संविधान के रिज़र्वेशन कानून को गैर-संवैधानिक घोषित कर दिया और पूरे देश में दलितों और आदिवासियों का रिज़र्वेशन रद्द कर दियातो DMK पार्टी ने पूरे देश में दलितों और आदिवासियों का रिज़र्वेशन बचाने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया। इस आंदोलन के सामने झुकते हुये केन्द्र सरकारने दलितों और आदिवासियों का रिज़र्वेशन को कायम रखने के लिए पहला संविधान संशोधन (Amendment-1951) करवाया। 5) संविधान में आरक्षण के लिए सिर्फ़ तीन कैटेगरी हैं, यानी Sc, St और OBC। लेकिन, तमिलनाडु की क्रांतिकारी DMK पार्टी सरकार ने इन कैटेगरी को सब-क्लासिफिकेशन (Quota within quota) करके आरक्षण को एक समान बाँट दिया है। क्योंकि तमिलनाडु में सभी ब्राह्मणवादविरोधी जाति-धर्म के लोगों को आरक्षण का एक जैसा फ़ायदा मिलता है, इसलिए वहाँ जाती-जातियों मे और धर्मों के बीच फूट डालने की कॉंग्रेस-संघ-BJP की साज़िश कामयाब नहीं हो सकती. 6) 1994 मे तामीलनाडू के असेम्ब्ली ने केन्द्र सरकार को आदेश दिया की संविधान संशोधन करके तामीलनाडू का 69 परसेंट आरक्षण को 9 वी सूची मे डालकर कायम करो, जो 50 परसेंट से ज़्यादा है, 7) सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, संसद, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल जैसी संवैधानिक और ताकतवर संस्थाओं को तामीलनाडू के सामने झुकने के लिए मजबूर करना, 8) स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने एक पब्लिक प्रोग्राम में ‘सनातन’ (ब्राह्मण) धर्म को खत्म करने की ज़रूरत’ के बारे में बात की. 9) चेन्नई के एक चौक पर गणपति की मूर्ति लगानेवाले और गणेशोत्सव मनाने वालों को मार-मारकर भगाना और गणेश की मूर्ति तोड़कर फेंक देना, 10) एक मंत्री का सरकारी पूजा कार्यक्रम से एक ब्राह्मण को बाहर निकालना, 11) कांग्रेस, RSS, BJP जैसी ब्राह्मणवादी पार्टियों और संगठनों को तमिलनाडु राज्य से बेजान कर देना, 12) ब्राह्मण पुजारियों को कानून बनाकर हिंदू मंदिरों से निकाल देना, 13) केंद्र और सुप्रीम कोर्ट द्वारा हिंदी भाषा, क्रीमी लेयर, ब्राह्मणों और क्षत्रिय जातियों के लिए EWS आरक्षण, मेडिकल NEET परीक्षा के बारे में लगाए गए कानूनों को तामीलनाडू नही लागू करना। ऐसी कई क्रांतिकारी घटनाएं सिर्फ तमिलनाडु में ही हो सकती हैं। क्योंकि तमिलनाडु ने एक लंबे सांस्कृतिक संघर्ष के जरिए खुद को ब्राह्मणवादविरोधी राष्ट्र साबित किया है। भारत के इस पहले और एकमात्र ब्राह्मणवादविरोधी राष्ट्र के राष्ट्रपिता सामी पेरियार हैं और प्रधानमंत्री स्टालिन हैं! सामी पेरियार ने फुलेइझम को नास्तिकवादसे जोडकर ‘ब्राह्मण-अब्राह्मणवाद’ को और ऊँचे लेवल पर पहुँचाया और उसे कामयाबी से लागू किया।

हाल ही में हुए असेंबली इलेक्शन के रिज़ल्ट आते ही एक Facebook दोस्त ने जो पोस्ट भेजी, उसे ज़रूर पढ़ना चाहिए। यह पोस्ट आम लोगों के मन की बात बताती है। यह इस तरह है-

‘‘तमिलनाडु के चीफ़ मिनिस्टर एम. के. स्टालिन और उनकी DMK कल के असेंबली रिज़ल्ट में हार गई। बंगाल और असम के रिज़ल्ट कुछ हद तक उम्मीद के मुताबिक थे। लेकिन केरल और तमिलनाडु के रिज़ल्ट मेरे लिए बिल्कुल भी उम्मीद के मुताबिक नहीं थे।

‘‘एम. के. स्टालिन की हार के साथ ही देश की पॉलिटिक्स का एक बड़ा दमदार राष्ट्रीय नेता (कम से कम कुछ समय के लिए) मैदान से बाहर हो गया है।

‘‘यह बात और भी ज़्यादा चौंकाने वाली है कि विजय की लीडरशिप वाली नई पार्टी ने DMK को हरा दिया।

‘‘स्टालिन और मेरे बीच कोई पर्सनल लेन-देन नहीं है। लेकिन अगर यह आदमी पिछले 5 सालों में भाषा और आर्थिक मुद्दों पर किए गए काम के बाद भी हारने वाला हैतो एक मुख्यमंत्री ने और कैसे काम करना चाहिये…

‘‘स्टालिन के नेतृत्व में, तमिलनाडु का GSDP (ग्रॉस स्टेट प्रोडक्ट) फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 16% बढ़ा। और पिछले 14 सालों में पहली बार, तमिलनाडु ने डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल की।

‘‘2021 से 2023 तक सिर्फ़ दो सालों में, स्टालिन सरकार ने राज्य में 9.74 लाख करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट लाया और 31 लाख नौकरियां पैदा कीं। इससे तमिलनाडु देश में सबसे ज़्यादा फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल वर्कर्स वाला राज्य बन गया। तमिलनाडु के इकोनॉमिक सर्वे ने फरवरी 2026 में अनुमान लगाया था कि तमिलनाडु 2031 तक $1 ट्रिलियन की इकॉनमी बन सकता है।

‘‘मुख्यमंत्री के तौर पर स्टालिन ने छात्रों के लिए मुफ्त नाश्ता, उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और महिलाओं के लिए मुफ्त बस पास जैसी कई योजनाएं लागू कीं। “शिक्षा केवल अमीरों का एकाधिकार नहीं होना चाहिए यह अन्नादुराई का सपना था। स्टालिन शायद उसी काम को जारी रखे हुए थे।

‘‘लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि स्टालिन की असली ताकत किसी भी मुद्दे पर, खासकर भाषाई मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की उनकी क्षमता में देखी जाती है। अलग-अलग समय पर जब भी हिंदी नामक संकट तमिल भाषा (और अन्य भाषाओं पर भी) आया, स्टालिन (और निश्चित रूप से उनके पूर्ववर्तियों) ने कड़ा संघर्ष किया और उस संकट को रोका। लेकिन जब तीन भाषा नीति के नाम पर हिंदी थोपने का खतरा अभी भी सबके सिर पर तलवार की तरह मंडरा रहा हैतो स्टालिन की हार का मतलब है कि अन्य भाषाओं का संकट और भी गहरा जाएगा।

‘‘स्टालिन ने समय-समय पर केंद्र सरकार से सीधे सवाल पूछे थे। उनके हालिया सवालों को देखें, जैसे- “NEET एग्जाम का मुद्दा होगा, तमिलनाडु को स्पेशल फंड न मिलने का मुद्दा होगा और डिलिमिटेशन बिल का मुद्दा होगा।

‘‘इसमें निश्चित रूप से पॉलिटिक्स है, उनका अपना फायदा है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि वे द्रविड़ आंदोलन की विरासत को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

‘‘अन्नादुराई ने 1950-60 के दशक में सही मायने में भाषा का इस्तेमाल किया। उसके बाद करुणानिधि ने भी इसका इस्तेमाल किया और स्टालिन ने 21वीं सदी की पॉलिटिक्स में इस भाषा का बहुत असरदार तरीके से इस्तेमाल किया और केंद्र सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

‘‘उन्होंने राज्य को NEET से छूट और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में तीन भाषा वाली पॉलिसी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने पुरजोर मांग की कि एजुकेशन राज्य का विषय होना चाहिए और इसे समवर्ती लिस्ट से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य की ऑटोनॉमी को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस कुरियन जोसेफ के नेतृत्व में एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई थी।

‘‘अगस्त 2025 में, वियतनामी इलेक्ट्रिक गाड़ी कंपनी विनफास्ट ने $2 बिलियन का इन्वेस्टमेंट करके तूतीकोरिन में एक बड़ी फैक्ट्री शुरू की। यह 3,500 नौकरियां पैदा होंगी। फरवरी 2026 में, टाटा मोटर्स और जगुआर लैंड रोवर ने भी 1.1 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट करके रानीपेट में एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया।

‘‘एक आम आदमी के तौर परअगर इतना कुछ करने के बाद भी कोई हार जाए तो उसे क्या करना चाहिए?

‘‘लेकिन यह सवाल मेरे लिए है, स्टालिन के लिए नहीं। हार के बावजूद, वे तुरंत अपनी कॉन्स्टिट्युएन्सी मे जनता को मिलने चले गये ओर उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसका सारांश इस प्रकार है-

“मैं उन सभी 1.54 करोड़ लोगों का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने असेंबली इलेक्शन में DMK फ्रंट पर भरोसा करके वोट दिया। जीतने वाली पार्टी को हमसे सिर्फ 3.52 परसेंट ज़्यादा वोट मिले। यह लोगों का हम पर मज़बूत भरोसा है। मैं DMK के सभी जीतने वाले कैंडिडेट से रिक्वेस्ट करता हूं कि वे सीधे लोगों के पास जाएं और उन्हें शुक्रिया कहें।

‘‘DMK ने अब तक कई जीत और हार देखी हैं। लेकिन इसकी पॉलिसी और सोच कभी डगमगाई नहीं। पार्टी के वर्कर ही हमारी असली ताकत और जान हैं। मुझे आपके सपोर्ट से ही ताकत मिलती है।

‘‘सत्ता में रहते हुए, हमने लोगों के लिए कई वेलफेयर स्कीम लागू कीं। अब एक मज़बूत विपक्षी पार्टी के तौर पर, हम लोगों के अधिकारों और मांगों के लिए ज़रूर लड़ेंगे।

‘‘हम अपनी संस्कृति (द्रविड़ियन), भाषा और देश को बचाने के लिए यह आंदोलन जारी रखेंगे, पेरियार, अन्ना (दुरई) और कलैगनार (एम. करुणानिधि) के विचारों की विरासत को बचाकर रखेंगे। हम निराश नहीं होंगे, हम फिर से ज़रूर जीतेंगे!”

‘‘हार के बावजूद, राज्य के विकास और अधिकारों के लिए एम. के. स्टालिन की लड़ाई और उनका विज़न तमिलनाडु के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।”

आइए अब आर्टिकल के तीसरे हिस्से में देखते हैं कि RSS-BJP ने भारत की इस अकेली जातिअंतवादी क्रांतिकारी पार्टी को हराने के लिए क्या कदम उठाए और इस ब्राह्मणवादी साज़िश में विजय नाम के दलित-ईसाई नेता की असल भूमिका क्या है!

लेखक – प्रो. श्रवण देवरे,

OBC पॉलिटिकल अलायंस,

मोबाइल- 81 77 86 12 56

ज़रूरी सूचना- 1) आर्टिकल का यह दूसरा हिस्सा (P2) ‘दाई. बहुजन सौरभ’ के 15 मई 2026 के अंक में पब्लिश हुआ है।

2) अगर आपको इस आर्टिकल की मराठी pdf (P2) फ़ाइल चाहिए, तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-   https://drive.google.com/file/d/13zn3UGBzcmehm72krn1SwntFfcMfZozq/view?usp=drive_link

3) इस आर्टिकल की हिंदी pdf (P2) फ़ाइल के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लि करें-   https://drive.google.com/file/d/171lLhjgICOU46c2N31f2LqaZCrZzHB63/view?usp=drive_link

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