समाज वीकली यू के

डॉ. रामजीलाल, समाज वैज्ञानिक,
पूर्व प्रिंसिपल, दयाल सिंह कॉलेज,
करनाल (हरियाणा, भारत)।
ईमेल: [email protected]
सर छोटू राम के विचार दर्शन व दूरदर्शी सोच के स्वतंत्रता-पूर्व पंजाब में ग्रामीण किसानों,कृषि श्रमिकों ,महिलाओं व वंचित वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक,व आर्थिक स्थितियों में सुधार करके उनको सशक्त बनाने, कृषि की स्थिरता बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने, शिक्षित ग्रामीण समाज का निर्माण करने प्रमुख केंद्र बिंदू थे.एक दूरदर्शी नेता के रूप में, उनका मुख्य लक्ष्य एक ऐसी सामाजिक-आर्थिक संरचना का निर्माण करना था जहाँ किसान शोषण, ऋण और साहूकारों के अत्याचार से मुक्त हों. जहां एक ओर उन्होंने ग्रामीण समाज को कृषि सुधारों व ग्रामीण उद्योग धंधों की स्थापना करके स्थिर व सतत् विकास पर बल दिया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने सतत विकास के लिए सामाजिक सौहार्द ,सामाजिक समरसता,सामाजिक भाईचारा , वैज्ञानिक चिंतन व धर्मनिरपेक्षता को इसके बहुत महत्वपूर्ण आधार माने हैं . उन्होंने समाज सुधारों के साथ-साथ संप्रदायवादी,व विभाजनकारी नीतियों का विरोध करते हुए धर्म के आधार – द्वि राष्ट्र का सिद्धांत–हिंदू राष्ट्र व मुस्लिम राष्ट्र – पर भारत के विभाजन की आलोचना की तथा हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख एकता पर बल दिया. यही कारण है कि सर छोटू राम को संयुक्त पंजाब के मुस्लिम अपने ‘हृदय सम्राट और बेताज बादशाह’ मानते थे.23 अक्टूबर 1942 को लायलपुर(पाकिस्तान ) में किसान महासभा के सम्मेलन के अध्यक्ष चौधरी हबीब ऊल्ला खां ने सर छोटूराम को’ रहबर-ए-आज़म’ (महान नेता) की उपाधि से नवाजने का प्रस्ताव पारित करवाया.जनता द्वारा प्रदत यह सर्वश्रेष्ठ सम्मान माना जाता है. इसलिए, संयुक्त पंजाब के मुसलमानों कायद-ए-आज़म मुहम्मद अली जिन्ना की तुलना में सर छोटू राम को एक महान नेता मानते थे.वर्तमान समय में ग्राम्य जीवन संबंधी उनके विचार दर्शन व दूरदृष्टता आज जीवंत हैं. उनकी दूरदृष्टि के प्रमुख महत्वपूर्ण पहलुओं का वर्णन अधोलिखित है:
विस्तार:
किसानों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार:
किसानों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार व ससत् विकास हेतु सर छोटूराम के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
A. जनमानस में जागरूकता पैदा करके लामबंद करना: किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए अनेक नीतियों ,योजनाओं और कानूनों का निर्माण करवाया. सामंतों ,साहूकारों व ब्रिटिश साम्राज्यवादी सरकार की शोषणकारी नीतियों, ब्रिटिश अधिकारियों के ‘तानाशाहीपूर्ण वअत्याचार पूर्ण व्यवहार’ पर रोक लगाने का प्रयास किया . .सर छोटू राम एक उत्कृष्ठ लेखक व पत्रकार थे.उन्होंने अपना चिंतन जनमानस तक पहुंचाने के लिए साप्ताहिक समाचार पत्र जाट गजट(रोहतक),द ट्रिब्यून (लाहौर), तथा अन्य समाचार पत्रों में लेख लिखे व जागरूकता पैदा करके लामबंद किया.
B. सतत विकास के लिए अवसंरचना: कृषि को बढावा देने व सतत् विकास के लिए अवसंरचना हेतु उन्होंने सतलुज नदी पर भाखड़ा बांध परियोजना पर मृत्यु (9 जनवरी 1945) से कुछ घंटे पूर्व हस्ताक्षर किये थे. इसलिए उन्हें ‘भाखड़ा डैम का जनक‘ कहा जाता है. भाखड़ा डैम का उदेश्य विशाल बंजर ज़मीन को उपजाऊ हरे-भरे लहलाते खेतों में बदलना था .आज भाखड़ा बांध परियोजना पंजाब ,हरियाणा व राजस्थान के किसानों की जीवन रेखा है.पंजाब ,हरियाणा हिमाचल चड़ीगढ़ व देहली में बिजली आपूर्ति कर रही है.
C. हरित क्रांति की सू्त्रधार: बेहतर सिंचाई के लिए योजनाएं कई सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत की, जिनमें हवेली परियोजना (1939) और थाल परियोजना (1942) , नहरों व रजवाहों का निर्माण शामिल हैं. बीज उत्पादन और पशु चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से कृषि में सुधार लाने का लक्ष्य भी उनकी दूरदृष्टि का परिचायक है. तत्कालीन विश्व प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ रामधन सिंह (कृषि कॉलेज व कृषि संस्थान, लायलपुर,अब पाकिस्तान) को प्ररित करके गेंहू (सी-306 व सी-518),धान-बासमती (सी-370)व अन्य फसलों- जौं, दाल व गन्ना) के बीजों की नई किस्में तैयार करवाई. जिसके परिणामस्वरूप हरित क्रांति का प्रारम्भ हुआ. डॉ. स्वामीनाथन को भारत में ग्रीन रेवोल्यूशन का जनक माना जाता है, और नॉर्मन बोरलॉग को दुनिया में ग्रीन रेवोल्यूशन का जनक माना जाता है, लेकिन उनसे बहुत पहले, 1930 के दशक में ही, डॉ. रामधन सिंह पंजाब में ग्रीन रेवोल्यूशन के ‘अग्रदूत और जनक ‘थे. इस बात को लेखकों और कृषि वैज्ञानिकों ने नज़रअंदाज़ किया है. इसके विपरीत सर छोटूराम की दूरदृष्टि व डॉ रामधन सिंह की कृषि खोज नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग सहित विश्व के कृषि वैज्ञानिकों व भारत सरकार की प्रेरणा की सू्त्रधार हैं. भारत के कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि संस्थानों में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक व शोधार्थी फसलों के नए बीजों के लिए रिसर्च लगातार कर रहे हैं.
D. किसानों को मुक्त करने के लिए कानून बनवाना: सर छोटू राम के ‘सुनहरी कानून’
पंजाब की यूनियनिस्ट पार्टी सरकार में डेवलपमेंट और रेवेन्यू मिनिस्टर के तौर पर, उन्होंने किसानों को मुक्त करने के लिए अनेक कानून निर्मित करवाए. इन कानूनों को तैयार करने में उन्होंनें अंग्रेजी भाषा व वकालत में महारत का भरपूर उपयोग किया ताकि भाषा व कानून की दृष्टि से कोई त्रुटि न हो. इन कानूनों को सर छोटू राम के ‘सुनहरी कानून’ माना जाता है.
महत्वपूर्ण कानून हैं:1.पंजाब रेस्टिट्यूशन ऑफ़ मॉर्गेज्ड लैंड एक्ट 4th, 1938, 2. पंजाब एलिएनेशन ऑफ़ लैंड एक्ट 5th 1938, 3. पंजाब एलिएनेशन ऑफ़ लैंड (अमेंडमेंट) एक्ट 2nd 1938, 4. पंजाब डेबटर्स प्रोटेक्शन एक्ट 1939 ,5. पंजाब एलिएनेशन ऑफ़ लैंड एक्ट 10th 1939, 6. पंजाब एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट्स (अमेंडमेंट) एक्ट 5th 1939, 7. पंजाब डेबटर्स प्रोटेक्शन एक्ट 1939, 8. पंजाब रिलीफ ऑफ इंडेब्टेडनेस (अमेंडमेंट) एक्ट 12th 1940,9. पंजाब वेट एंड मेजर एक्ट 12th 1941, 10. द शुगरकेन पंजाब (अमेंडमेंट) एक्ट 1942 और 11. . समेकन(चकबंदी)अधिनियम (1936, संशोधित1940 तथा1945).
इन कानूनों में, पंजाब रिलीफ ऑफ इंडेब्टेडनेस (अमेंडमेंट) एक्ट 12th 1940, और मॉर्गेज्ड लैंड्स रेस्टिट्यूशन एक्ट 1938 सबसे ज़रूरी हैं..इन कानूनों में कर्जा माफी अधिनियम, व गिरवी जमीनों की वापसी सबसे महत्वपूर्ण हैं. सन 1938 में संयुक्त पंजाब की कुल आबादी 28.49 मिलियन थी. धार्मिक संरचना की दृष्टि से 57% मुस्लिम, 28% हिन्दू, 13% सिक्ख और 2% ईसाई थे. पंजाब की कुल जनसंख्या में 2.3 करोड़ (90%) किसान थे तथा उनमें से 80% किसान कर्जदार थे. कर्ज माफी अधिनियम के अंतर्गत 3,65,000 किसानों का श्रृण माफ हुआ और भूमि गिरवी जमीन वापसी अधिनियम के अंतर्गत 8,35,000 एकड़ भूमि किसानों को वापस हुई . यह कोई अतिश्योक्ति नहीं अपितु तथ्यात्मक है.पंजाब और हरियाणा के किसानों के पास जो कृषि भूमि है वह सर छोटू राम के कारण है. (Times of India, November 25, 2024).
पंजाब भूमि समेकन (चकबंदी) अधिनियम (1936, संशोधित1940तथा1945) सर छोटू राम छोटू राम ने 1936 में पारित करवाया .इसका मुख्य उद्देश्य बिखरे हुए कृषि भूखंडों को बड़े प्रबंधनीय इकाइयों में समेकित करना था ताकि बेहतर सिंचाई, आसान खेती और उच्च उत्पादकता संभव हो सके . सहकारिता विभाग को यह कार्य करने का दायित्व सौंपा गया. सर छोटूराम की दृष्टि केआधार पर भूमि के विखंडन को रोकने के लिए हरियाणा और पंजाब में पूर्वी पंजाब होल्डिंग्स (समेकन और विखंडन की रोकथाम) अधिनियम, 14 दिसंबर, 1948 को पारित किया गया .पंजाब व हरियाणा में 1950 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ और 1960 के दशक तक जारी रहा. 1 नवंबर 1966 तक हरियाणा के लगभग 80% से अधिक गांवों में चकबंदी का काम पूर्ण हो चुका था. हरियाणा और पंजाब में जमीन की चकबंदी अनिवार्य थी. 1 दिसंबर 1999 तक भारत के केवल 14 राज्यों में चकबंदी केवल 1615.30 लाख एकड़ भूमि की गई थी. कुछ राज्यों में चकबंदी धीमी गति से अभी भी जारी है.
सर छोटू राम की ऋण माफी की योजनाओं को केंद्रीय और कुछ प्रांतीय सरकारों ने लागू किया .राष्ट्रीय स्तर पर सर्व प्रथम वीपी सिंह की सरकार ने सन्1990में किसानों का 10,000 करोड़ का कर्ज माफ किया गया था . इसके18 वर्ष पश्चात कांग्रेस नीत यूपीए की मनमोहन सिंह की केंद्रीय सरकार के द्वारा सन् 2008 में ऋण माफी व राहत योजनाओं के तहत 600 बिलियन रूपये का कर्ज माफ किया तथा जिस से 30मिलियन लघु व हाशिये पर रहने वाले किसान लाभार्थी हुए . सन् 2008-2009 के वित्तीय वर्ष में 20% की बढ़त के साथ कर्जा माफ़ी की राशि 716 बिलियन रुपये हो गई. तेलंगाना में 3.6मिलियन व आंध्र प्रदेश में 4.9मिलियन किसानों को कर्ज से मुक्ति प्राप्त हुई. सन 2017 में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक की सरकारों ने 40 – 50 बिलीयन डॉलर किसानों का कर्ज माफ किया.
सन् 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी (अब भारत के प्रधानमंत्री )ने 437 जनसभाओं को संबोधित किया.इनमें से 219 जनसभाओं में नरेंद्र मोदी ने स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने, किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (C2 + 50%)देने तथा कर्ज माफी का आश्वासन दिया था. भारतीय जनता पार्टी के सन् 2014 के संकल्प पत्र में किसानों को उत्पाद के लिए लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने का आश्वासन भी किया गया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार का नेतृत्व मुकर गया और सन् 2015 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर किया है जिसमें कहां गया कि सरकार यह वादा पूरा नहीं कर सकती.
सर छोटू राम ने किसानों की उपज के लाभकारी मूल्य की वकालत की, जिसकी परिणति अंततः स्वामीनाथन रिपोर्ट 2006 में हुई, जिसमें सिफारिश की गई कि किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य – एमएसपी (सी 2 + 50%) दिया जाना चाहिए. लेकिन यह फॉर्मूला न तो यूपीए और न ही एनडीए सरकारों द्वारा लागू किया गया.
>किसान आंदोलनों की पृष्ठभूमि:
संक्षेप में, भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री, रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा को एक लिखित जवाब में बताया कि 31 मार्च, 2024 तक 18.74 करोड़ किसान (किसानों का 50.2%) कृषि ऋण से दबे हुए थे. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अनुसार, 31 मार्च, 2025 तक कुल कृषि ऋण ₹28.50 लाख करोड़ (₹28,50,779 करोड़) था.31 मार्च, 2024 तक, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में किसानों का कुल बकाया कर्ज़ ₹2.20 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गया था.
किसानों और खेतिहर मजदूरों की हालत सुधारने के लिए, राष्ट्रीय स्तर पर सभी बकाया कर्ज माफ कर दिए जाने चाहिए. किसानों का तर्क है कि अगर केंद्र सरकार ने 2015 से मार्च 2025 के बीच पूंजीपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये (16.35 ट्रिलियन रुपये) के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA)– माफ कर दिए, तो किसानों के लिए भी ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता?
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इसके अतिरिक्त, कॉर्पोरेट्स/निगमों को यूपीए और एनडीए सरकारों द्वारा आयकर, उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क से कई ट्रिलियन रुपये की छूट दी गई . इसके अलावा, हजारों एकड़ जमीन नाममात्र राशि (एक रुपये) या मुफ्त या औने-पौने दाम पर कॉर्पोरेट्स/ निगमों को पट्टे पर दे दी गई. वहीं, हीरा, सोना और आभूषण व्यापारियों को कई ट्रिलियन डॉलर की छूट भी दी गई. किसान कर्ज़ माफ़ी और मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) की मांग कर रहे हैं, जो C2+50% फ़ॉर्मूले पर आधारित है, जिसकी सिफारिश स्वामीनाथन कमेटी ने अपनी 2006 की रिपोर्ट में की थी और जिसका वादा नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव की जनसभाओं में किया था.
E. ग्रामीण औद्योगिकीकरण और सशक्तिकरण: कृषि के विकास के बाद, उन्होंने सबसे पहले ग्रामीण औद्योगिकीकरण की ओर कदम उठाए. ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे पैमाने और कुटीर उद्योगों को विकसित करने का विचार ताकि स्थायी ग्रामीण रोजगार प्रदान किया जा सके. ग्रामीण उद्योगों को विकसित करने के लिए उन्होंने सबसे पहले पंजाब फाइनेंस बोर्ड की स्थापना की. इसके बाद, पानीपत में लॉन्ड्री और क्लीनिंग इंडस्ट्री, लुधियाना में होजरी इंडस्ट्री और हिसार में टेक्सटाइल मिल व कुल्लु में ऊन कताई मिल की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम थे. सर छोटू राम की यह परिकल्पना वास्तव में सन् 1991 के पश्चात भारत सरकार की कॉरपोरेट्रीकरण की नीतियों के विपरीत है.कॉरपोरेट्रीकरण,निजीकरण,वैश्
F. शानदार संवैधानिक क्रांति के दूरदर्शी नेता : सर छोटू राम उस ज़माने के एक दूरदर्शी नेता थे. उनका मानना था कि लैंगिक समानता का सपना तभी पूरा होगा जब महिलाएं कानून बनाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेंगी. इसी कारण से 83 साल पहले 1943 में, पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50% सीटें और विधान सभा में 20% सीटें आरक्षित करने का कानून बनाया गया था. हालांकि, 9 जनवरी 1945 को रहबर-ए-आज़म दीनबंधु सर छोटू राम की अचानक मौत के कारण यह एक्ट लागू नहीं हो सका और यह ठंडे बस्ते में चला गया. लेकिन, यह सोच निरंतर प्रेरित करती रही. भारतीय संविधान के राज्यनीति के निर्देशक सिद्धांत(अध्याय 4) के अंतर्गत अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के निर्माण से संबंधित निर्देश दिए गए हैं. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन पर राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव में पंचायती राज की नींव रखी थी. इस ऐतिहासिक घटना के बाद, विभिन्न राज्यों में पंचायती राज की स्थापना हुई.
भारतीय संविधान के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम (1992) के माध्यम से, पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया गया, और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम (1992) के अंतर्गत शहरी स्थानीय स्वशासन में भी महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया. इसके परिणामस्वरूप, 73वें संशोधन के आधार पर विभिन्न राज्यों ने पंचायती राज एक्ट पास किए. 27 अगस्त 2009 को, डॉ. मनमोहन सिंह की कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार (कैबिनेट) ने तय किया कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण होना चाहिए. 50% आरक्षण लागू करने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 243D में संशोधन करने का निर्णय लिया गया. भारत के 21 राज्यों में, पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में महिलाओं के लिए 50% सीटें आरक्षित हैं. ये राज्य हैं — आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल. वास्तव में, यह सर छोटू राम द्वारा शुरू की गई महिलाओं को मज़बूत बनाने की एक शानदार संवैधानिक क्रांति है..
106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2023, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम‘ के नाम से भी जाना जाता है. इस संशोधन के अनुसार लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की गई है. इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है और इसे अगली जनगणना तथा पहले परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा. यह महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है. यह उल्लेखनीय उपलब्धि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक शांतिपूर्ण संवैधानिक क्रांति का प्रतीक है, जिसकी शुरुआत सर छोटू राम ने की थी.
G. समाज के हाशिय़े पर रहने वाले वर्गों को मुक्ति दिलवाना: ग्रामीण क्षेत्र में सतत विकास हेतु केवल किसानों के लिए ही नहीं अपितु समाज के हाशिय़े पर रहने वाले वर्गों के लिए भी अनेक काम किए हैं .उदाहरण के तौर पर राजपूताना में कुम्हारों पर चाक लाग(₹5 प्रतिवर्ष प्रति चाक) को समाप्त करवाना, नाईयों को कतरन लाग,मारवाड़ा में नायक व बावरी जातियों (भेड़.-बकरियां पालने वाले )को कतरन लाग से मुक्ति दिलवाना (26 जुलाई1941),बुनकर लाग को चार साल(-सन्1937-सन्1941)तक आंदोलन का नेतृत्व करके शेखावटी,मारवाड़,जयपुर,पाली व बालोतरा के जुलाहों (मेघवाल जाति) को मुक्ति दिलवाना इत्यादि.
H. शिक्षा : सतत विकास की नींव: सर छोटू राम अविभाजित पंजाब के एक प्रमुख समाज सुधारक और शिक्षाविद थे.ग्रामीण सशक्तिकरण हेतु उनका मानना था कि ग्रामीणों को अपने अधिकारों और समाज को समझने के लिए शिक्षा आवश्यक है.यही कारण है कि किसानों और ग्रामीण समुदायों के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए जाट शिक्षा समिति (1913) की स्थापना की व संस्थागत ढांचा तैयार किया, रोहतक में एंग्लो-संस्कृत जाट हाई स्कूल (1913), जाट हीरोज मेमोरियल कॉलेज की स्थापना , स्कूल खोले, पंजाब प्राथमिक शिक्षा अधिनियम लागू किया और मंत्री के रूप में (1924-26, 1937-45), उन्होंने कृषि परिवारों के छात्रों के लिए विशेष शुल्क रियायतें सुनिश्चित कीं. पंजाब के राजस्व मंत्री के रूप में वह अपने वेतन के एक बड़े भाग से ग्रामीण गरीब परिवारों से आने वाले मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता देकर मदद करते थे. उन्होंने किसान कल्याण कोष की स्थापना की तथा धर्म व जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया. यही कारण है कि प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुस सलाम (पाकिस्तान) को भी किसान कल्याण कोष से आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी.महिलाओं को शिक्षित करने पर बल देते हुए महिला शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में अभूतपर्व सहायता की. आजादी के बाद, अलग-अलग सरकारों ने शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है.
I. समाज सुधारक: अस्पृश्यता एक बुराई: सर छोटू राम एक आर्य समाज होने के नाते समाजसुधारक थे और वह अस्पृश्यता को एक बुराई मानते थे. 1 जुलाई 1940 को छुआछूत बुराई विरोधी कानून का निर्माण करवाया गया और इसे सख्ती से लागू करने के आदेश जारी किए.सरकारी कर्मचारियों को आदेश दिया कि वे अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों से संबंधित लोगों से बेगार नहीं लेगें तथा इसे अपराध घोषित किया. अनुसूचित जातियों के लिए ‘दलित’ शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा. केवल यही नहीं, उन्होंने सार्वजनिक कुओं को सभी जातियों के लिए खोलने के आदेश भी जारी किए.
J. अनुसूचित जातियों के लोगों को भूस्वामी बनाना: 13 अप्रैल 1938 को असंख्य बाधाओं को पार करके 4,54, 625 एकड़ कृषि योग्य सरकारी भूमि 3 रू.प्रति एकड़ बिना ब्याज के 12 वर्षों में जो चार आने (वर्तमान में 25 पैसे)प्रति वर्ष की किस्त के आधार पर अनुसूचित जातियों को अलाट करके भूस्वामी बना दिया. यह भूमि मुल्तान (पाकिस्तान) जिले के अनुसूचित जातियों के लोगों को 13 अप्रैल (बैसाखी के दिन) अलाट की गई . उसी दिन अनुसूचित जातियों के लोगों ने सर छोटू राम को हाथी पर बैठ कर जुलूस निकाला जिसमें हजारों की संख्या में अनुसूचित जातियों व अन्य जातियों के लोग सम्मिलित हुए . इस जनसैलाब में सर छोटू राम को ‘दीनबंधु’ की उपाधि देकर सम्मानित किया गया.यह सम्मान विश्वविद्यालयों अथवा सरकारों के द्वारा दिए जाने वाले किसी भी सम्मान की अपेक्षा बहुत बड़ा सम्मान था.
संक्षेप में, सर छोटू राम की विचारधारा, आदर्श ,सिद्धांत व दूरदृष्टा –धर्मनिरपेक्षता, हिंदू -मुस्लिम- सिख एकता, वैज्ञानिक चिंतन, सामाजिक व शैक्षणिक सुधार ,अनुसूचित जातियों का उद्धार, पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण व शिक्षाके द्वारा राजनीतिक सशक्तिकरण, किसान- हितैषी सुनहरी कानूनों का निर्माण व कार्यान्वन, कर्जा माफी इत्यादि सतत् विकास के लिए वह प्राथमिक आधार हैं, जो 21वीं शताब्दी में भी सरकारों का मार्ग प्रस्सत कर रहे हैं व प्रासंगिक हैं.



