26नवंम्बर(संविधान दिवस)पर* लखनऊ चलो! लखनऊ चलो!!

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(समाज वीकली)

*आजमगढ़ मंदुरी हवाई अड्डा के विस्तारिकरण के नाम पर जमीन-मकान के अधिग्रहण पर रोक लगाओ।*

*ऐतिहासिक किसान आंदोलन का सम्मान करते हुए वादाखिलाफी बंद करो।*

*कौन बनाता हिंदुस्तान-भारत का मजदूर-किसान।*

मेहनतकश भाईयों और बहनों!

हम एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं।आजमगढ़ के गदनपुर हिच्छनपट्टी, जिगिना करमनपुर, जमुआ हरीराम, जमुआ जोलहा, हसनपुर, कादीपुर हरिकेश, जेहरा पिपरी, मंदुरी, बलदेव मंदुरी गांव के ग्रामीणों की आंखों की नींद गायब कर दी गई है।12-13अक्टूबर2022 के दिन व रात के अंधेरे में शासन-प्रशासन और पुलिस-पीएससी की करतूत को भुलाया नहीं जा सकता। महिने भर से ज्यादा हम अपनी मकान-जमीन बचाने और पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ़ खिरिया की बाग में क्रमिक धरना दे रहे हैं।जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन सौंपा गया। हम अपनी जमीन,मान-सम्मान की रक्षा के लिए और अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक रुप से अपनी आवाज उठा रहें हैं।

साथियों,ऐसा नहीं है कि हमारे साथ ही ऐसा हो रहा है और पहली बार ऐसा हो रहा है। उत्तर प्रदेश में हजारों गांवों के किसानों ,गरीबों, दलितों, मजदूरों को भू माफिया घोषित कर उजाड़ने की नोटिस दी गई है।भूमि अधिग्रहण,वनसंरक्षण कानूनों में संशोधन करके भी भूमि बेदखली की जा रही है। तीन कृषि काले कानून वापसी के चलते खेती की जमीन तो बच गई लेकिन सरकार एयरपोर्ट हाईवे,एक्सप्रेस-वे , फ्लाई ओवर ,टूरिज्म कारिडोर,इंडस्ट्रियल कारिडोर, सैंचुरी, अभ्यारण्य आदि के नाम पर चोर दरवाजे से जमीन छिनने का काम कर रही है।यही सरकार11अक्टूबर2020को गरीब,भूमिहीनों को खेती की खतौनी की तरह घर का घरौनी का भी वादा किया था लेकिन करोड़ों लोग आज तक बिना घरौंनी के बसे हैं।इन्हें भी उजाड़ना आसान बना हुआ है।कई जगह बुलडोजर चले हैं और दलित, मजदूर, किसान परिवार बेघर हो चुके हैं ।लाखों परिवारों पर विस्थापन की तलवार लटकी है। किसानों की भूमि कारपोरेट घरानों(बड़े पूंजीपति घरानों)को दिया जाना है।

उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में किसानों को उजाड़ने का क्रूर अभियान चल रहा है। उत्तर प्रदेश के बुलडोजर राज का चरित्र गरीब भूमिहीन ,मजदूर, किसान, दलित, महिला,आदिवासी विरोधी है। सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश में विस्फोटक स्थिति बन चुकी है। ऐसे संकट की घड़ी में हम अपनी मांगों को लेकर 26नवंबर2022,संविधान दिवस के अवसर पर लखनऊ में जाकर राज्यपाल भवन तक क्यों मार्च करना चाहते हैं?

साथियों, 26नवंबर ही वह दिन है जब किसान आंदोलनकारियों ने दिल्ली बार्डर पर डेरा डाल दिया दिया था । इसी दिन से जाड़ा,गर्मी,बरसात को दिल्ली बार्डर की सड़कों पर तेरह महिने बिताया।इस बीच कुल 750 किसानों को खो दिया,जिन्हें हम शहीद का दर्जा देते हैं।इस बीच खीरीं-लखीमपुर में किसान-पत्रकार नरसंहार भी हुआ,इस घटना का मुख्य षड्यंत्रकारी अजय मिश्र टेनी,आज भी केंद्रिय गृहराज्य मंत्री के पद पर बेशर्मी से विराजमान है।

किसान विरोधी तीन कृषि कानून व सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य(एम.एस.पी.) की कानूनी गारंटी जैसे मांगों के लिए 13माह के ऐतिहासिक व किसान आंदोलन से घबड़ाकर सरकार ने किसानों से19नवंबर2021(विजय दिवस)को लिखित वादा किया था कि किसानों के सभी सवालों को जल्द हल किया जाएगा। हमारे आंदोलन के स्थगित हुए एक वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन अभी तक लंबित सवालों पर सरकार ने हम किसान संगठनों से वार्ता करने का कोई संकेत नहीं दिया है।

जिससे स्पष्ट है कि सरकार ने हम किसानों के साथ धोखा किया है। जनता के साथ वादाखिलाफी मोदी सरकार की चारित्रिक विशेषता है। वह किसानों के सवालों को हल करने की जगह कारपोरेट परस्त(पूंजीवादी-साम्राज्यवादपरस्त) नीतियों को लागू करने में जुटी है । एम.एस.पी. पर नकली सरकारी कमेटी बनाने के फरेब के बाद बिजली बिल का जनविरोधी मसौदा संसद में पेश किया जा चुका है।

ऐतिहासिक किसान आंदोलन का 26 नवंबर 2022 को 2 साल पूरा हो जायेगा। वादा के अनुसार एम.एस.पी. के लिए कानून , बिजली बिल 2020 की वापसी , आंदोलनकारियों पर से सभी मुकदमें हटाने,शहीद किसानों को सम्मान और लखीमपुर में किसानों के नरसंहार के साजिशकर्ता गृह राज्य मंत्री को अभी तक बर्खास्त नहीं किया गया है।

पिछले 2 सालों में खेती-किसानी में कर्जदारी बढ़ी है। आत्महत्या करने वालों का दायरा किसान और उनके शिक्षित नौजवान बेटों तक फैल गया है। महंगी शिक्षा-स्वास्थ्य, भीषण बेरोजगारी के सवाल और जटिल हो गए हैं। आसमान छूती महंगाई से मेहनतकश तबाह हैं।ग्रामीण मजदूरों को भूख से मरने के लिए छोड़ दिया गया है और खाद्य सुरक्षा गारंटी से सरकार पीछे हट चुकी है । मनरेगा का बजट बढ़ाने की जगह घटा दिया गया।साम्राज्यवादी देशों पर सरकारों के निर्भरता के चलते लाखों उद्योग-धंधे और खेती-किसानी को चौपट बना दिया गया।

मजदूरों का पलायन तो बढ़ गया लेकिन शहर भी मजदूरों को खपा नहीं पा रहे हैं। सिर्फ ट्रेनों में ठूंस-ठूंसकर एक शहर से दूसरे शहर भटक रहे हैं। महंगाई के हिसाब से फसलों के दाम नहीं बढ़े। सरकारी खरीद घटकर 35% रह गई है। अभी तक धान क्रय केंद्र नहीं खुले और किसानों के पिछले साल के गन्ने का भुगतान तक नहीं हुआ।बटाईदार किसानों को सरकार किसान मानने के लिए तैयार नहीं है जिससे वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है।उनके पंजीकरण के लिए कानून बनाने की मांग लंबित पड़ी है। पराली जलाना अभी भी दंडनीय अपराध है।दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए किसानों को बेशर्मी के साथ दोषी ठहराया जा रहा है।

इसलिए जमीन-मकान बचाओ संयुक्त मोर्चा ,संयुक्त किसान मोर्चा को एकताबध्द होकर व्यापक आंदोलन करने की जरुरत है। इसी उद्देश्य से शहीद किसानों की याद को दिल में सजाए हुए 26 नवंबर 2022 को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देश के सभी राज्यों के राजभवनों तक मार्च का फैसला किया गया है। जहां अपने *मांग-पत्र* को राज्यपाल के हाथों सौंपा जाएगा ।

सभी किसान भाइयों,बहनों से अपील है कि बड़ी से बड़ी तादात में 26 नवंबर को लखनऊ में *ईको गार्डेन* पहुंचे और राजभवन तक मार्च को सफल बनाएं।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ।

मकान-जमीन बचाओ संयुक्त मोर्चा
सम्बध्द-संयुक्त किसान मोर्चा ,आजमगढ़

सम्पर्क सूत्र:-9935503059,9452800752,9554913204,9889231737,9415835719,9598412431,7007210832,8948460080,9839055970,726342733

 

 

 

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