श्री आनंदपुर साहिब (समाज वीकली) जहां हर कोई अपने आप में मग्न है और अपने परिवार तक ही सीमित है, वहीं स्टेट अवार्डी अध्यापक संजीव धर्माणी हर बार की तरह इस बार भी गर्मी की छुट्टियों में शिवालिक पहाड़ियों व अन्य स्थानों के जंगलों में जा रहे हैं जहां प्यासे पक्षियों को पानी पिलाने के साथ ही उन्हें दाना भी खिला रहे हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि जहां हर कोई इतनी गर्मी में पहाड़ों पर घूमने व सैर करने जा रहा है, वहीं शिवालिक पहाड़ियों व अन्य जंगलों में जहां पशु-पक्षी पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं, वहीं वह जंगलों में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर मिट्टी के बर्तन रखकर पक्षियों के लिए पानी का प्रबंध कर रहे हैं और साथ ही चूंकि गर्मी के कारण सभी पेड़-पौधे व झाड़ियां सूख चुकी हैं, इसलिए वह पक्षियों को भूख से बचाने के लिए दाना भी डाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईश्वर की कृपा से वह वर्ष 1995 से लगातार अपनी जेब से पैसे खर्च करके पक्षियों की सेवा कर रहे हैं और यह सब करके उन्हें अपार खुशी मिलती है। वह पक्षियों के लिए साल भर दाना-पानी उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही वह जंगलों में जाकर गर्मी या आग के कारण सूख गए पेड़ों को पानी देकर उन्हें फिर से हरा-भरा करने और अन्य पेड़ों को गर्मी से बचाने का काम भी करते हैं। इसके अलावा वह पेड़-पौधे लगाकर उनकी देखभाल कर पर्यावरण को बचाने के लिए भी तत्पर रहते हैं। मास्टर संजीव धर्माणी द्वारा किए जा रहे इस कार्य की जहां क्षेत्र में चर्चा हो रही है, वहीं हर कोई इस कार्य की प्रशंसा कर रहा है कि जहां मनुष्य प्रकृति का विनाश कर रहे हैं, वहीं ऐसे भी लोग हैं जो प्रकृति से जुड़कर पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं और बेसहारा पशु-पक्षियों को भोजन-पानी उपलब्ध कराकर मानवता के लिए बड़ा कार्य कर रहे हैं। स्टेट अवार्डी मास्टर संजीव धर्माणी जहां अपनी कविताओं और कहानियों के माध्यम से लोगों को पशुओं – पक्षियों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं, वहीं मानवता और पर्यावरण के कल्याण के लिए कार्य कर दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी बन रहे हैं।
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