(समाज वीकली) भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, पंजाब में बौद्धों की आबादी 33,237 है। ये सभी बौद्ध अनुसूचित जातियों से धर्म परिवर्तन करके बौद्ध बने हैं। फिलहाल इन धर्म परिवर्तन करने वाले बौद्धों को राज्य सेवाओं में आरक्षण का हक नहीं है, जबकि सिख धर्म अपनाने वालों को यह लाभ मिलता है। संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) अधिनियम, 1990, संख्या 15, 1990 ने बौद्धों को उन जातियों की सूची में जोड़ा है जो आरक्षण के हकदार हैं। (कॉपी संलग्न)। इस तरह पंजाब के बौद्ध धर्म अपनाने वाले भी आरक्षण के हकदार हैं। भारत सरकार ने OM नंबर 12016/28/90-SCD (R.L.Cell) कल्याण मंत्रालय/कल्याण मंत्रालय दिनांक 20 नवंबर, 1990 के माध्यम से, जो सभी राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के SC/ST के कल्याण से संबंधित कल्याण विभाग के सचिव को संबोधित है, अनुसूचित जाति से बौद्ध धर्म अपनाने वालों को अनुसूचित जाति का सदस्य माने जाने पर लगी रोक को हटाने के विषय पर, अनुसूचित जातियों के सदस्यों पर लागू होने वाली उसी प्रक्रिया के तहत SC जाति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। (कॉपी संलग्न) यह कहा गया है कि कई राज्यों में अनुसूचित जातियों से बौद्ध धर्म अपनाने वालों को आरक्षण का लाभ दिया गया है, लेकिन पंजाब के बौद्ध धर्म अपनाने वाले अभी भी इस लाभ से वंचित हैं। इसलिए, अनुरोध है कि इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और बौद्ध धर्म अपनाने वाले अनुसूचित जातियों को आरक्षण का लाभ दिया जाए।
एस.आर. दारापुरी आई.पी.एस. (सेवानिवृत्त)
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय पीपुल्स फ्रंट


