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नागा पहाड़ियों में विकास परियोजनाएं और अवैध खनन: असम की बाढ़ त्रासदी का कारण !

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समाज वीकली यू के

नव ठाकुरीया

पड़ोसी राज्य नागालैंड में हुई ज़बरदस्त बारिश ने असम के निचले इलाकों में कई दिनों तक भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी। नागालैंड में कई वर्षों से चल रही विकास गतिविधियों के कारण वहां का पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। इस बाढ़ के लिए केवल मॉनसून की भारी बारिश ही ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि नागा पहाड़ियों में कानूनी और अवैध कोयला खनन के कारण बड़े पैमाने पर हुई पेड़ों की कटाई भी एक बड़ी वजह है। इस कटाई ने पूर्वी असम की नदियों के जल-प्रवाह तंत्र (हाइड्रोलॉजी) को चुपचाप बदल दिया है। कभी घने जंगलों से आच्छादित और वर्षा जल को सोखने वाली स्थिर पारिस्थितिकी वाले नागा क्षेत्र धीरे-धीरे बंजर भूमि में बदल गए हैं। ये भूमि अब अधिक समय तक वर्षा का पानी नहीं रोक पाती, जिससे कीचड़युक्त पानी तेज़ी से बहकर असम की घाटियों में पहुंच जाता है। इसी का परिणाम है कि असम के मुख्यतः पूर्वी जिलों में बाढ़ की वर्तमान लहर आई है।

इस ताज़ा बाढ़ में शनिवार तक कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ बच्चे भी शामिल हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, इस बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिला शिवसागर रहा, इसके बाद चराइदेव, जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, होजई, नगांव, कार्बी आंगलोंग, विश्वनाथ, धेमाजी, कामरूप तथा कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिले प्रभावित हुए। बाढ़ ने लगभग 935 गांवों में करीब 7.45 लाख लोगों को प्रभावित किया। इसमें लगभग 50,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा और 1.25 लाख से अधिक पालतू पशु (मुर्गी पालन के पक्षियों सहित) बह गए। संबंधित प्रशासन द्वारा कम से कम 250 बाढ़ राहत शिविर तथा अनेक राहत वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं।

राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सेना और वायु सेना के जवान स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों तथा स्वयंसेवकों के साथ मिलकर चौबीसों घंटे बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विशेष रूप से राज्य के मंत्रियों—बिमल बोरा, सुशांत बोरगोहेन, पीयूष हजारिका, केशव महंता और अजंता नियोग—को ज़मीनी स्तर पर इन अभियानों की निगरानी करने का निर्देश दिया है। हालांकि, हज़ारों प्रभावित परिवार अब भी पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी आवश्यक राहत सुविधाओं से वंचित हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को भारी क्षति पहुंची है।

18 से 20 जुलाई के बीच नागालैंड और असम में लगातार भारी बारिश हुई, जबकि नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग, लोंगलेंग और वोखा जिलों से वर्षा का पानी भारी मात्रा में मलबे के साथ बहकर नीचे आया। मोन जिले में 137 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई और सोमवार को भूस्खलन में नौ लोगों की मौत हो गई। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों के लिए 70 लाख रुपये की अनुग्रह राशि जारी की। नागा पहाड़ियों से निकलने वाली अनेक नदियों के कारण असम के आसपास के गांवों में अभूतपूर्व बाढ़ आ गई। इसके बाद नागालैंड में NEEPCO द्वारा संचालित डोयांग जलविद्युत परियोजना से पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

शुरुआत में यह माना गया था कि नागालैंड के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने से असम के मैदानी क्षेत्रों में तबाही मची, लेकिन भारतीय मौसम विभाग ने ऐसी खबरों का खंडन किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह घटना बादल फटने की श्रेणी में नहीं आती, जिसके लिए किसी छोटे भौगोलिक क्षेत्र में एक घंटे के भीतर कम से कम 100 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उन दिनों नागालैंड और असम में दैनिक वर्षा की मात्रा इस सीमा से कम थी। असम की जीवनरेखा, विशाल ब्रह्मपुत्र नदी, कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि इसकी प्रमुख सहायक नदियां—बुढ़ी दिहिंग, दिसांग, दिखौ, डोरिका, धनसिरी, भोगदोई और कुशियारा आदि—भी विभिन्न स्थानों पर उफान पर हैं।

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने राज्यभर में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चल रहे राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए लोक भवन में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) की असम इकाई के पदाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। सशक्त और सक्रिय प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल आचार्य ने संबंधित पक्षों से अपने आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और प्रभावी बनाने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने बाढ़ के बाद जलजनित तथा मच्छरों एवं अन्य कीटों से फैलने वाली बीमारियों के संभावित प्रकोप से निपटने के लिए एहतियाती उपाय अपनाने पर भी ज़ोर दिया।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पूर्वी असम में बाढ़ की गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और राज्य सरकार को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में असम की बाढ़ की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी। सोनोवाल ने कहा कि केंद्र और असम सरकार स्थिति से निपटने के लिए निकट समन्वय बनाए हुए हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषि भूमि, पशुधन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार असम के बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हरसंभव सहायता देती रहेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री सरमा को फोन कर नई दिल्ली से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी बताया कि नुकसान का आकलन करने तथा आजीविका की पुनर्बहाली के लिए आवश्यक केंद्रीय सहायता निर्धारित करने के उद्देश्य से एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम असम का दौरा करेगी। इस बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने संकट से निपटने के लिए चल रहे कार्यों की समीक्षा करने हेतु जिला आयुक्तों और अन्य संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की। इससे पहले उन्होंने चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों से बातचीत की। असम सरकार ने बाढ़ में अपने परिजनों को खोने वाले प्रत्येक परिवार को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा पहले ही कर दी है।

हालांकि, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सरकार की अपर्याप्त प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि पड़ोसी पूर्वोत्तर राज्यों के साथ उसका समन्वय बेहद कमजोर रहा है। बाढ़ प्रभावित अनेक क्षेत्रों का दौरा करते हुए जोरहाट के सांसद ने अधिकारियों से राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र ने दिसपुर में मौजूदा सरकार पर सड़कों और फ्लाईओवर के निर्माण को प्राथमिकता देने, लेकिन जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों पर पर्याप्त ध्यान न देने का आरोप लगाया। शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने भी बाढ़ प्रभावित अनेक क्षेत्रों का दौरा करने के बाद सरकार से आपदा तैयारियों को और मजबूत करने की मांग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि नागालैंड में बेतरतीब निर्माण गतिविधियों, अनियंत्रित खनन और जंगलों के विनाश ने असम में बाढ़ की स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणीय विषयों के विश्लेषक

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